ताल भरे, टूटे और मिलकर तबाही ले चले
प्रोफेसर चुनियाल ने उपग्रह के चित्रों में खीर गंगा के उद्गम स्थल (ग्लेशियर) को भी दिखाया। उन्होंने विश्लेषण करते हुए बताया कि यहां पर सैकड़ों छोटे-छोटे ताल बने हुए हैं। ग्लेशियर एक तीव्र ढाल है। यहां पानी इकट्ठा हुआ तो सभी ताल भरने लगे। एक ताल टूटा तो उसने अगले ताल को भर दिया। पानी का दबाव तालों से सहा नहीं गया तो यह बोल्डर व अन्य मलबा लेकर आगे बढ़ा और नीचे धराली में तबाही मचा दी।
पूर्वजों की सोच वाला धराली आज भी महफूज
धराली एक पुराना गांव है। यह भागीरथी के पूर्व में एक छोटी पहाड़ी पर बसा हुआ है। यह गांव खीर गंगा के फ्लड जोन से पूरी तरह बाहर है। नदी इस पहाड़ी की तलहटी से होकर दक्षिण की ओर मुड़ जाती थी। नया थराली इसी दक्षिण दिशा में बने फ्लड प्लेन में बसा दिया गया। खीर गंगा ने यहां तबाही मचाई मगर पुराने धराली को छू भी न सकी। पूर्वजों ने भी इस तरह की आपदा के मद्देनजर सुरक्षित स्थान का चयन किया होगा।