कुछ लोग कटिंग वाले क्षेत्र को पार कर चुके थे लेकिन जब अरुण और मनीष वहां से गुजरने लगे तभी पहाड़ी से अचानक मलबा आया और वह उसमें दब गए। मनीष की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अरुण की सांसें चल रही थीं।
उसने गंगनानी के समीप एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद से हर्षिल घाटी के लोगों ने बीआरओ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह घटना प्रशासन और बीआरओ की गलती से हुई है।