ये है जीआई टैग
क्षेत्र विशेष के उत्पादों को भौगोलिक संकेत दिया जाता है, जिसका एक विशेष भौगोलिक महत्व व स्थान होता है। उसी भौगोलिक मूल के कारण उत्पाद विशेष गुण व पहचान रखता है। जीआई टैग मिलने के बाद कोई अन्य उत्पाद की नकल नहीं कर सकता है।
इन उत्पादों को मिल सकता जीआई टैग
प्रदेश में नौ उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है। इसमें तेजपात, बासमती चावल, एपेण आर्ट, मुनस्यारी का सफेद राजमा, रिंगाल क्राफ्ट, थुलमा, भोटिया दन, च्यूरा ऑयल, टम्टा शामिल है। 14 अन्य उत्पादों के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। इनमें बेरीनाग चाय, मंडुवा, झंगोरा, गहत, लाल चावल, काला भट्ट, माल्टा, चौलाई, लखोरी मिर्च, पहाड़ी तुअर दाल, बुरांश जूस, सजावटी मोमबत्ती, कुमाऊंनी पिछोड़ा, कंडाली(बिच्छू बूटी) फाइबर शामिल हैं।
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उत्तराखंड में जीआई बोर्ड बनने से स्थानीय उत्पादों को टैग के जरिये कानूनी संरक्षण मिलेगा। बोर्ड का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बोर्ड का काम सिर्फ उत्पादों को जीआई पंजीकरण दिलाना रहेगा। वर्तमान में 14 उत्पादों का जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। केंद्र की ओर से उत्पादों की गुणवत्ता व भौगोलिक स्थान के आधार पर ही जीआई टैग दिया जाता है।
-विनय कुमार, प्रबंध निदेशक उत्तराखंड जैविक विकास परिषद