तुंगनाथ घाटी के साथ चमोली के 60 से अधिक गांवों को जोड़ने वाले कुंड-ऊखीमठ-चोपता-मंडल-चमोली राजमार्ग के भूस्खलन व भूधंसाव जोन के स्थायी सुधार में टीएचडीसी तकनीकी सहयोग करेगा। विशेषज्ञों का दल हाईवे का स्थलीय निरीक्षण करेगा। टीम के सुझाव पर यहां सुरक्षा दीवार, कटिंग और पुश्ता निर्माण को लेकर नई तकनीक के हिसाब से योजना तैयार की जाएगी।
84 किमी लंबे कुंड-ऊखीमठ-चोपता-मंडल-गोपेश्वर हाईवे पर ऊखीमठ से चोपता तक चार डेंजर जोन हैं। इसमें जयवीरी, पापड़ी-मस्तूरा-घाटी, ताला और पिंगलापानी शामिल हैं। पिछले साल से भूधंसाव व भूस्खलन की दृष्टि से पापड़ी से पिंगलापानी तक चार किमी क्षेत्र अति संवेदनशील है। यहां सड़क के ऊपर व नीचे की तरफ जगह-जगह दरारें पड़ी हैं, जो बरसात के कारण चौड़ी हो रही हैं। रविवार रात को भी तेज बारिश का पानी दरारों में भरने से पापड़ी में राजमार्ग का 40 मीटर हिस्सा धंसाव से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यहां वाहनों के संचालन के लिए मिट्टी का भरान किया जा रहा है।
वहीं, एनएच ने प्रभावित हिस्से के स्थायी ट्रीटमेंट के लिए टीएचडीसी से सहयोग मांगा गया है। इस सप्ताह टीएचडीसी के विशेषज्ञों का दल राजमार्ग का स्थलीय निरीक्षण करते हुए भूस्खलन व भूधंसाव जोन का प्रारंभिक जायजा लेगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर नई कार्ययोजना बनाई जाएगी। एनएच की ओर से भी हाईवे के जिन स्थानों पर भूमिगत पानी रिस रहा है या गदेरों के ऊफान से मिट्टी कटाव हो रहा है, वहां गेविन वॉल के साथ दो तरफा सुरक्षा दीवारें व पुश्तों के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। यही नहीं, बरसाती स्रोतों व गदेरों का पानी सड़क तक न पहुंचे, इसके लिए निकास नाली के साथ चेंबर तैयार किए जाएंगे। भूधंसाव क्षेत्रों में सड़क का चौड़ीकरण करते हुए टीएचडीसी के सहयोग से केमिकल के साथ डामरीकरण व हॉटमिक्स किया जाएगा जिससे बरसाती पानी सड़क के अंदर न घुसे। वहीं, आबादी क्षेत्रों में आवासीय व व्यवसायिक भवनों की सुरक्षा के लिए सड़क के ऊपरी तरफ सीढ़ीनुमा पुश्तों का निर्माण किया जाएगा।
टीएचडीसी के विशेषज्ञों से हाईवे को लेकर बात हुई है। विशेषज्ञों की टीम हाईवे का निरीक्षण कर स्थायी समाधान के लिए सुझाव देगी। राजमार्ग पर प्रभावित क्षेत्रों में चौड़ीकरण, पुश्ता निर्माण व सुरक्षा दीवार की योजना बनाई जाएगी।
-जितेंद्र कुमार त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता एनएच, रुद्रप्रयाग