उत्तराखंड में 17, 18 और 19 अक्तूबर को हुई भारी बारिश के बाद आई आपदा से अभी संभले भी नहीं थे कि रविवार शाम प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुई जोरदार बारिश ने एक बार फिर लोगों को डरा दिया। इस दौरान शासन-प्रशासन से जुड़े लोग एक बार फिर अलर्ट मोड पर आ गए।
रविवार को राज्य सचिवालय स्थित आपातकालीन परिचालन केंद्र में फिर से हलचल बढ़ गई। हालांकि मौसम विभाग की ओर से राज्य के उत्तरकाशी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल सहित चंपावत जिले में हल्की वर्षा, गर्जन के साथ बौछारें पड़ने की चेतावनी जारी की गई थी। इसके देखते हुए शासन-प्रशासन पहले ही अलर्ट मोड में था। लेकिन बारिश शुरू होते ही लोगों के बीच डर का माहौल बन गया। खासकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोग सहमे रहे।
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हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दौरान राज्य में बारिश से किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं है। प्रदेश में रविवार तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 72 ही थी, जबकि कुल मरने वालों की संख्या 80 बताई जा रही है। सचिवालय स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली सूचना के अनुसार, आपदा में अल्मोड़ा में छह की मौत हुई दो घायल हुए, चंपावत में 11 की मौत हुई चार घायल हुए, बागेश्वर में एक मौत हुई।
नैनीताल में मरने वालों की संख्या 35 है, जबकि घायलों की संख्या पांच बताई गई है। इसी तरह से यूएसनगर में दो मौत, तीन घायल, पौड़ी में तीन की मौत, दो घायल, पिथौरागढ़ में तीन की मौत, दो घायल, चमोली में एक की मौत और चार घायल और उत्तरकाशी में दस की मौत और चार लोग घायल बताए गए हैं।
क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों की संख्या 224 पहुंची
जैसे-जैसे आपदा में हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है, क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या बढ़ती जा रही है। रविवार तो क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या 224 पहुंच गई थी। इनमें अल्मोड़ा में 40, चंपावत में 2, नैनीताल में 74, यूएस नगर में सर्वाधित 93 और चमोली में 15 भवनों को नुकसान पहुंचा है। इनमें आवासीय के साथ व्यवसायिक भवन भी शामिल हैं। कुछ भवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं तो कुछ को आंशिक क्षति पहुंची है।