पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश के बाद हरिद्वार में गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। चेतावनी के निशान 293 मीटर से एक मीटर कम 292 पर गंगा का जलस्तर पहुंचा गया है। गंगा के किनारे ग्रामीणों की चिंता बढ़ने लगी है और बाढ़ चौकियों पर ताले लटके हैं। प्रशासनिक अधिकारी भी अलर्ट जारी करने के बाद क्षेत्रों का निरीक्षण कर हकीकत जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
मालूम हो कि श्यामपुर से लेकर लक्सर तक गंगा के किनारे के इलाके बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं। हर साल बरसात में गंगा का पानी तटबंधों को तोड़कर खेतों तक पहुंच जाता है। 2013 की आपदा के समय तो बहुत नुकसान हुआ था।
बिशनपुर कुंडी और पुरानी कुंडी गांव गंगा किनारे स्थित हैं। यहां बाढ़ आने का सबसे ज्यादा खतरा होता है। इसलिए यहां जिला प्रशासन मानसून आने से पहले ही बाढ़ चौकी खोल देता है। इस बाद भी पंचायत घर में बाढ़ चौकी पर कर्मचारी की तैनाती की गई थी। यहां कर्मचारी पहुंचा ही नहीं और ताला लटका है।
ग्रामीण कुंवरपाल, चमनलाल, सतपाल, ब्रजपाल, गीतू राम आदि कहना है कि गंगा किनारे क्षतिग्रस्त तटबंधों के कारण इस बार भी बाढ़ का खतरा है। सिंचाई विभाग ने समय रहते तटबंधों की मरम्मत नहीं की। अब प्रशासन ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए लापरवाह बना है। ग्राम प्रधान सविता देवी और उप प्रधान सुखदेव पाल का कहना है कि गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और ग्रामीणों को अलर्ट करने वाला कर्मचारी लापता है।
बिशनपुर कुंडी में बाढ़ सुरक्षा चौकी पर कर्मचारी की तैनाती की गई थी। कर्मचारी के नदारद रहने की जानकारी लेकर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
- कुश्म चौहान, एसडीएम हरिद्वार।