जोशीमठ क्षेत्र में शुक्रवार शाम सात बजे से भारी बारिश शुरू हो गई थी, जो रातभर जारी रही। रात करीब एक बजे पैनी मोड़ के पास खनोटी नाला उफान पर आ गया, जिससे यहां स्थित चार ढाबे पानी में समा गए। पैनी (जोशीमठ) निवासी दीपक बिष्ट, अरविंद बिष्ट, भरत सिंह और सेलंग के सुभाष भंडारी निवासी यह ढाबे संचालित कर रहे थे। जबकि सेलंग निवासी कल्पेश्वर भंडारी व राजेंद्र नेगी के ढाबों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
बदरीनाथ हाईवे पर भी भारी मलबा आ गया। शनिवार को सुबह पांच बजे जैसे ही यात्रा वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो खनोटी नाले के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। यहां करीब दस मीटर तक हाईवे क्षतिग्रस्त हुआ है। सूचना मिलने पर सुबह छह बजे बीआरओ के अधिकारी जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंचे। मलबे का निस्तारण कर सुबह आठ बजे यहां वाहनों की आवाजाही शुरू हुई।
जोशीमठ के एसडीएम अनिल चन्याल ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। दिनभर यहां मलबे में यात्रा वाहन फंसते रहे। खनोटी नाले से सेलंग और पैनी गांव के ग्रामीणों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी बह गई है। वहीं, भारी बारिश से सलूड़-डुंग्रा मोटर मार्ग भी जगह-जगह मलबा आने से बाधित हो गया है। सलूड़ गांव के आशीष सिंह के आवासीय भवन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। एसडीएम अनिल चन्याल ने कहा कि क्षेत्र में अवरुद्ध पड़े मोटर मार्गों को जेसीबी के जरिए खोला जा रहा है। बार-बार मौसम खराब होने के कारण सड़कों को सुचारु करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तरकाशी शुक्रवार देर रात से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। भूस्खलन के कारण शनिवार को यमुनोत्री हाईवे सहित करीब एक दर्जन मोटर मार्ग घंटों तक बाधित रहे। वहीं हर्षिल के निकट गदेरे में पानी बढ़ने और मलबा आने के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी बाधित हो गया है। हाईवे के दोनों ओर दर्जनों लोग घंटों फंसे रहे। जिन्हें बीआरओ कर्मचारियों ने दोपहर बाद सुरक्षित निकाल लिया। हाईवे को सुचारू करने का प्रयास किया जा रहा है।
शुक्रवार शाम से ही जनपद के तमाम क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही है। जिससे विभिन्न क्षेत्रों में भूस्खलन, भूधंसाव व गाड गदेरों में जल स्तर बढ़ने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में हर्षिल क्षेत्र स्थित नाले का जलस्तर बढ़ने व भारी मलबा आने के कारण गंगोत्री हाईवे का करीब 100 मीटर हिस्सा शनिवार सुबह आठ बजे बाधित हो गया। जिसके चलते दर्जनों तीर्थयात्री व स्थानीय ग्रामीण हाईवे के दोनों ओर फंस गए। मौके पर मौजूद बीआरओ कर्मियों ने कुछ ही घंटों में सभी लोगों को रस्सियों के सहारे सुरक्षित निकाल लिया।
बीआरओ कर्मचारी हाईवे खोलने में जुट गए हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव और मलबा अधिक होने के कारण समाचार लिखे जाने तक गंगोत्री हाईवे पर यातायात सुचारु नहीं हो सका है। उधर, ओजरी-डबरकोट में भारी भूस्खलन के कारण यमुनोत्री हाईवे भी देर रात से बाधित रहा। जिसे सुबह करीब आठ बजे सुचारु किया गया था। इसके अतिरिक्त हुल्डीयाणा, इंद्रा-टिपरी, छैजुला-कवाटा, नौगांव-राजगढ़ी, थौलधार-बयाली, टिकोची-सिरतोली, चिंवा-मोंडा, गमरी-मैंजणी, मोरी-सांकरी, ज्ञानसू-साल्ड तथा पलार मोटर मार्ग भी भूस्खलन के कारण घंटों तक बाधित रहे। उक्त सभी मोटर मार्गों पर दोपहर बाद तक यातायात बहाल कर लिया गया।
देवाल के फल्दिया गांव में दस दिन पूर्व प्राकृतिक आपदा के दौरान बही पुष्पा देवी का शव शनिवार को कल्याड़ी झूलापुल के पास पिंडर नदी के किनारे मिला है, जबकि उसकी बेटी ज्योति का अभी भी पता नहीं चल पाया है। राजस्व निरीक्षक एसएस नेगी ने बताया कि शनिवार की सुबह एक मछुवारे ने पिंडर नदी किनारे एक महिला का शव होने की सूचना दी। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर महिला के शव को नदी से निकाला।
महिला के शव की शिनाख्त फल्दिया गांव की पुष्पा देवी के रूप में उसके पति रमेश राम ने की। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को मौके पर ही पुष्पा देवी के शव का पोस्टमार्टम किया गया। उसके बाद परिजनों ने गमगीन माहौल में पुष्पा देवी का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान एसडीएम केएस नेगी, तहसीलदार एसएस रांगण, राजस्व निरीक्षक एसएस नेगी, एसएचओ सुभाष जखमोला, चौकी प्रभारी जगमोहन पडियार, पटवारी विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।
विकासनगर में त्यूनी तहसील क्षेत्र के बानपुर और कास्टा गांव को जेपीआरआर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाला अस्थाई पुलिया शुक्रवार रात उफनाए कास्टा खड्ड की चपेट में आकर बह गई है। जिससे 150 परिवारों का संपर्क मुख्य सड़क से कट गया है। अब लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के नौ किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्रों को हो रही है। पुलिया निर्माण की मांग के लिए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि तीन साल पूर्व भी उफनाए खड्ड की चपेट में आकर स्थाई पुलिया बह गई थी। तब ग्रामीणों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लकड़ी की अस्थाई पुलिया का निर्माण किया था। लेकिन शुुक्रवार रात वह भी बह गई। जिससे ग्रामीणों का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह से कट गया है। खड्ड में अब भी पानी तेज वेग के साथ आ रहा है। जिस कारण उसे पैदल भी पार नहीं किया जा सकता। कहा कि इन दिनों क्षेत्र में इन दिनों काश्तकारों की नकदी फसलें सेब, आलू, टमाटर, गोभी, आदि निकाली जा रही है। ऐसे में पुलिया के बहने के कारण अब काश्तकारों को इन फसलों को मंडी तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त दूरी और अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है। शिकायत करने वालों में सुनील रावत, कमाल, त्रिलोक सिंह, यशवंत, कमाल सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं।
तेज बारिश के बीच ग्राम पंचायत सुजऊ के बानुवा खेड़ा में एक मकान भरभरा कर ढह गया जबकि, इसी ग्राम पंचायत के टटाई खेड़ा में एक मकान को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। मकान के ढहने से पीड़ित परिवार के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत के बानुवा खेड़ा में गीताराम जोशी का मकान है। शुक्रवार सुबह चार बजे परिवार के सभी लोग घर में सो रहे थे। तभी गीताराम की भाभी ने कुछ गिरने की आवाज सुनी। उन्होंने बाहर जाकर देखा तो बांई तरफ की दीवार के पत्थर गिर रहे थे।
आनन फानन में उन्होंने सभी को घर से बाहर निकाला, जिसके बाद पूरा मकान ढह गया। मकान के नीचे दब कर रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं कपड़े, अनाज, बर्तन सब कुछ दब कर बर्बाद हो गया। इससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। वहीं, टटाई खेड़ा गांव निवासी दौलत राम जोशी के मकान की एक तरफ की दीवार गिर गई। जिस समय दीवार गिरी उस समय घर में कोई नहीं था, जिस कारण बड़ा हादसा होने से बच गया। पीड़ित परिवारों ने तहसील प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है। उधर, संपर्क करने पर तहसीलदार केएस नेगी ने बताया कि अभी फिलहाल मामला संज्ञान में नहीं है। पटवारी से रिपोर्ट मांगकर कार्रवाई की जाएगी।
मलबे में दबने से गर्भवती की मौत
तेज बारिश में बागेश्वर जिले की कांडा तहसील के अंतर्गत ढोलगांव में बृहस्पतिवार तड़के साढ़े तीन बजे एक मकान भरभराकर ढह गया। मलबे में गृहस्वामी देव सिंह की बहू प्रेमा देवी (22), बेटा नीरज सिंह नगरकोटी दब गए। दूसरे कमरे में सोए देव सिंह और उनकी पत्नी कौशल्या देवी ने शोर मचाया तो पड़ोस में रहने वाले पूरन सिंह ने मलबे में दबे नीरज को बाहर निकाल लिया। सूचना पर पहुंची आपदा प्रबंधन की टीम और ग्रामीणों ने प्रेमा देवी को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। नीरज की कमर में हल्की चोट है। उसे सीएचसी कांडा में भर्ती कराया गया है। प्रेमा तीन माह की गर्भवती थी। उधर, पहाड़ी दरकने से पिथौरागढ़-टनकपुर एनएच पांच घंटे बंद रहा जबकि गणाईगंगोली-बनकोट सड़क 15 घंटे तक बंद रही।
भारी बोल्डर और मलबा आने से कैलाश मानसरोवर मार्ग तवाघाट के पास बंद हो गया। सड़क बंद होने से धारचूला से बूंदी जा रहे 17वें दल के यात्रियों को पांगला में रोका गया है। दल को रविवार को बूंदी के लिए रवाना किया जाएगा। मलबा आने से जिले की 10 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें हैं।
उधर, मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग पर दरकोट के पास चट्टान में दरार आने के कारण बीआरओ ने एहतियातन 21 अगस्त तक सड़क को बंद कर दिया है। वहीं, शनिवार को चंपावत-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग अलग अलग स्थानों आठ बार बंद हो गया। इधर स्वांला में सीएमओ के वाहन में पीछे की तरफ एक पत्थर लगा। इससे वे बाल-बाल बच गए। वहीं स्वांला से आगे आने पर आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय के वाहन के शीशे में भी एक पत्थर लगा जिससे शीशे में दरार आ गई। उन्होंने भी वाहन को तुरंत उस जोन से बाहर निकाला।
बागेश्वर जिले के कांडा तहसील के अंतर्गत ढोल गांव के आपदा पीड़ित परिवार को प्रशासन ने गांव के पंचायत घर में शिफ्ट कर दिया है। ढोलगांव में देव सिंह नगरकोटी का मकान गुरुवार तड़के साढ़े तीन बजे भरभराकर ढह गया। मलबे में दबने से उनकी बहू प्रेमा देवी की मौत हो गई थी।