मार्ग से मलबा हटाती जेेसीबी
बागेश्वर में 13 सड़के बंद : बागेश्वर जिले में कपकोट-पिंडारी ग्लेशियर, सौंग-खलीधार और कपकोट-कर्मी मार्ग समेत बारिश और मलबे से 13 सड़कें बंद हैं। सरयू नदी के उफान पर होने और भारी सिल्ट के चलते पंपिंग योजनाएं दिनभर बंद रही। पंपिंग और फिल्टरेशन प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति नहीं हो पाई। रविवार रात से लेकर मंगलवार सुबह तक बागेश्वर में 97.50 एमएम, कपकोट में 472.50 एमएम जबकि गरुड़ में 30 एमएम बरसात हुई।
मदकोट में भारी नुकसान : पिथौरागढ़ के मदकोट में गोरी नदी के उफान में बालीबगड़ को जोड़ने वाले दो पुल बह गए। अब दस गांवों को जोड़ने के लिए एकमात्र ट्रॉली का सहारा बचा है। यहां दो मकान ध्वस्त हो गए। गांव के 10 परिवारों ने लोदी गांव में ली शरण है। जौलजीबी-मदकोट सड़क डौलागाड़ के पास बह गई है। टनकपुर -पिथौरागढ़ हाईवे पर धौन के पास मलबा आने से आवाजाही बंद हो गई। नाचनी में भैंसखाल के खबरिया नाले में बनी 11 मीटर स्पान की पुलिया ढहने से आवागमन बाधित हो गया है। इसके अलावा, मंगलवार को थल-मुनस्यारी, घोरपट्टा-वर्नियागांव, डीडीहाट-दूनाकोट, डीडीहाट-पमस्यारी, कपकोट-सामा-तेजम, नाचनी-बांसबगड़, ग्रिफबैंड-दरकोट, डांडाधार-पापड़ी, मदकोट-दारमा सड़कों में यातायात बहाल हो गया है।
नैनीझील का जलस्तर बढ़ा : नैनीताल में मंगलवार तड़के हुई बारिश के बाद दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। नगर को कोहरे ने अपनी चपेट में ले लिया। दूसरी ओर नगर में लगातार बारिश की वजह से जीवनदायिनी नैनी झील का जलस्तर भी बढ़ रहा है। सोमवार को जहां जलस्तर माइनस 1.35 फुट था, जो मंगलवार को बढ़कर माइनस 1.20 फुट पहुंच गया।
पौड़ी जनपद में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते मलबा आने से 28 मोटर मार्ग अवरुद्ध हो गए। पीएमजीएसवाई के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में 18, निर्माण खंड के छह एवं प्रांतीय खंड के चार मोटर मार्ग बंद हैं।
श्रीनगर खंड के अंतर्गत डुंगीपंत-खिर्सू, कोटद्वार में जाखणीधार-अमोला, धारकोट-कलवाड़ी, सतपुली में एकेश्वर-गुराड़ मल्ला, पीपलबैंड-दलमोटा, अमोठा-डोबल, पाटीसैंण-तजवार, लवाड़-बदूण, पैडुल पुल-कोलरी मोटर मार्ग, बैजरो में कासानी-ढिसवानी, सिमढ़ी-कांडा, बीरोंखाल-डुमैला तल्ला, जड़ाऊखांद-किनाथ, बेदीखाल-चोरखिंडा, भरोली-मैठाणा, सौन्दरबैंड-ऐंठी, सिमड़ी-कंडोली, बेदीखाल-भौराड़ मोटर मार्ग, निर्माण खंड के अंतर्गत दुगड्डा में धारकोट-जुलेड़ी, बैजरो में मैठाणाघाट-ग्वीन-रसियामहादेव, नैनीडांडा-शंकरपुर, शंकरपुर-हल्दूखाल, विजयगांव-जौलीखंड, लिस्टकोट- किनगोड़ीखाल मोटर मार्ग, लैंसडौन में तंधार-ल्वाण, मस्तखाल-पुसालू-उतलींडा, मस्तखाल-नैल कुठार, बढ़खेत- तिमलसैंण मोटर मार्ग बंद हैं।
12 घंटे बंद रहा कालसी-चकराता मोटर मार्ग
कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर बारिश के बीच जगह-जगह मलबा आने से वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। करीब 12 घंटे तक सड़क पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप रही। यात्रियों को वाहनों में ही रात गुजारनी पड़ी। फसलें भी सही समय पर मंडी तक नहीं पहुंच सकी। जिसके चलते काश्तकारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। मंगलवार सुबह 11 बजे लोनिवि की जेसीबी ने मलबा हटा सड़क पर यातायात बहाल कराया।
पहाड़ी अंचलों में सोमवार देर रात 11 बजे शुरू हुई बारिश के बीच जजरेट, असनाड़ी, चापनू, जड़वाला के पास जगह-जगह पहाड़ी के दरकने से भारी मलबा आ गया। जिससे सड़क पर वाहनों की रफ्तार पूरी तरह से थम गई। सुबह 11 बजे तक जजरेट के पास पहाड़ी से पत्थरों और मलबा के लुढ़कने का सिलसिला जारी रहा। मलबा गिरने की रफ्तार थमने के बाद लोनिवि ने जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर सड़क पर यातायात बहाल कराया।
मलबा आने से सड़क के दोनों ओर करीब दो किमी लंबी वाहनों की कतार लग गई। लोगों को वाया कालसी-बैराटखाई और हरिपुर-क्वानू होते हुए सफर करना पड़ा। फसलों के सही समय पर मंडी न पहुंचने से काश्तकारों को वाजिब दाम नहीं मिल सका। उन्हें अपनी फसलों को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ा। मालूम हो कि कालसी-चकराता मोटर मार्ग को जौनसार बावर का प्रवेश द्वार कहा जाता है। इस सड़क से 80 से अधिक गांव की आबादी जुड़ी हुई है। कई गांवों के लिए इसी सड़क से छोटे-बड़े मार्ग कटते हैं। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से इन सभी गांव का संपर्क पूरी दुनिया से कट जाता है। लंबे समय से लोग जजरेट के पास पहाड़ी से लुढ़कते पत्थरों को देखते हुए पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांग को अनसुना किया जा रहा है।