प्रदेश में बरसात का सीजन शुरू होते ही संभावित आपदाओं के दृष्टिगत सभी विभागों को अलर्ट रहने को कहा गया है। जबकि एनएच, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), लोनिवि, जल संस्थान और विद्युत विभाग के अधिकारियों को आपदा के दौरान दो घंटे के भीतर अपनी सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए गए।
विधानसभा में महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े अधिकारियों की बैठक लेते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है, जिसके मद्देनजर आपदा विभाग सहित तमाम रेखीय विभागों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने की आवश्यकता है। खासकर एसडीआरएफ, पुलिस, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को हर समय चौकन्ना रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फिलहाल दो हेलीकॉप्टर किराये पर लिए गए हैं। एक की तैनाती पिथौरागढ़ में कर दी गई है, जबकि दूसरा हेलीकॉप्टर शीघ्र ही गौचर में तैनात कर दिया जाएगा।
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने आपदा के दौरान सूचनाओं के आदान- प्रदान, त्वरित कार्रवाई, राहत और बचाव कार्यों के कुशल संचालन के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से युक्त एक रिस्पांस सिस्टम तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। जिसमें आपदा के दौरान आपदा प्रबंधन एवं विभागों के पास मौजूद उपकरणों, मानव संसाधनों एवं समस्याओं के निस्तारण की तकनीकी जानकारी तत्काल प्राप्त हो सके।
बैठक में अपर सचिव आपदा प्रबंधन सबिन बंसल, उप महानिरीक्षक एसडीआफएफ रिद्धिम अग्रवाल, महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. तृप्ति बहुगुणा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीएमजीएसवाई एवं एमडी पेयजल निगम उदय राज सिंह, मुख्य अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग एसके बिरला, संयुक्त खाद्य आयुक्त पीएस पांगती, जीएम उत्तराखंड जल संस्थान आरके रोहिल्ला, एसके पाठक, अतुल कुमार, एनएस बिष्ट, के. मेहता, बीके यादव, अमित जोशी आदि अधिकारी उपस्थित रहे।