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Uttarkashi Cloudburst: यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड के पास बादल फटा...नौ मजदूर लापता, दो के शव बरामद

Sun, 29 Jun 2025 06:57 AM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, बड़कोट(उत्तरकाशी)

सार

Uttarakhand Weather Cloudburst News Update: यमुनोत्री हाईवे पर देर रात बादल फटने से तबाही मच गई। इस दौरान आठ से नौ मजदूर लापता हो गए हैं।
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उत्तरकाशी में बादल फटा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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शनिवार को देर रात सिलाई बैंड के समीप बादल फटने से यमुनोत्री हाईवे का करीब 20 मीटर हिस्सा बह गया। वहीं, ऊपरी क्षेत्र में बादल फटने से टैंटों में रह रहे नौ मजदूर पानी और मलबे के तेेज बहाव में बहने से लापता हो गए। बाद में दो लोगों के शव बड़कोट में यमुना नदी में मिले।

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शनिवार रात को यमुनोत्री हाईवे के आसपास कई स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं हुईं। इसमें पालीगाड से लेकर सिलाई बैंड और ओजरी तक कई स्थानों पर सड़क का करीब 20 मीटर हिस्सा बह गया। वहीं, सिलाई बैंड में नाले के पास बादल फटने से आए मलबे और पानी के तेज बहाव से वहां टैंट में रह रहे 9 मजदूर बह गए। जबकि करीब 20 मजदूरों ने भागकर जान बचाई। पुलिस व एसडीआरएफ ने उन्हें पालीगाड पहुंचाया। इसके बाद बचाव दल ने लापता लोगों की तलाश शुरू की। इनमें से दो के शव यमुना नदी में मिल गए। हादसें में बचे मजदूरों ने उनकी शिनाख्त दूजेलाल (55) निवासी पीलीभीत और केवल बिष्ट (43) निवासी नेपाल के रूप में हुई। टीम लापता सात लोगों की तलाश कर रही है।

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जगह-जगह सड़क क्षतिग्रस्त होने से एनएच को निर्माण में परेशानी झेलनी पड़ रही है। डीएम प्रशांत आर्य ने बताया कि मौके पर प्रशासनिक टीम बचाव अभियान में जुटी है। दो लोगों के शव मिल चुके हैं। अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। लापता लोगों में नेपाल और देहरादून के मजदूर शामिल हैं।

ये मजदूर चल रहे लापता

1. रोशन चौधरी (37) निवासी नेपाल।
2. अनवीर धामी (40) निवासी नेपाल।
3. कल्लूराम चौधरी (60) नेपाल।
4. जयचंद (38) कालिदास रोड देहरादून।
5. छोटू (22) कालिदास रोड देहरादून।
6. प्रियांश (20) कालिदास रोड देहरादून।
7. सर कटेल धामी (32) निवासी देहरादून।

अधिकारियों के लगातार संपर्क में रहे सीएम धामी

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बादल फटने की घटना का अधिकारियों से संज्ञान लिया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि दुखद घटना में कुछ श्रमिकों के लापता होने की सूचना मिली है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ समेत अन्य टीमें घटनास्थल पर पहुंच गई हैं और गहन राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। मैं इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हूं...




आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आस-पास के पुलिस और सेना के जवानों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया है और एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है। 15 लोग बचाव कार्य में लगे हुए हैं और लगभग 45 लोग रास्ते में हैं। यहां मशीनें नहीं पहुंच पा रही हैं और टीमें ही रेस्क्यू में लगी हैं। श्रमिक या तो मलबे में फंसे हुए हैं या चट्टान में या नदी में बह गए हैं। उन्हें ढूंढने का  प्रयास जारी है।


यमुनोत्री हाईवे कई जगह बंद

बादल फटने के बाद से यमुनोत्री हाईवे सिलाई बैंड समेत कई जगहों पर बंद है। एनएच की टीम रास्ता खोलने के प्रयास में जुटी है। वहीं, ओजरी के पास भी सड़क पूरी तरह से खत्म हो गई है। खेतों में मलबा भर गया है। स्यानाचट्टी में भी कुपड़ा कुंशाला त्रिखिली मोटर पुल खतरे में आ गया है। यमुना नदी का भी जलस्तर बढ़ा हुआ है। 

मलबा आने से यमुना नदी का बहाव थमा, झील बनी

यमुनोत्री हाईवे पर स्थित स्याना चट्टी के पास कुपड़ा कुनसाला मोटर मार्ग पर पुल के पास ऊपर से भारी मलवा बोल्डर आने से यमुना नदी का बहाव थम गया और यहां झील बननी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों के साथ यमुना नदी तटवर्ती क्षेत्र में रह रहे लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह रावत ने बताया कि यहां होटल की सीढ़ी तक पानी पहुंच गया है।


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दून समेत सात जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट

बीते कुछ दिनों से उत्तराखंड में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है। आज (रविवार) से अगले तीन दिन तक प्रदेश के सात जिलों में भारी से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। जबकि अन्य कई जिलाें में भी तेज दौर की बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि 29 जून से लेकर एक जुलाई तक दून समेत टिहरी, पौड़ी, चम्पावत, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ इलाकों में भारी से भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।

जबकि रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के भी कुछ हिस्सों में कई दौर की भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को हिदायत देते हुए उन्होंने कहा कि इन तीन दिनों में जलभराव, भूस्खलन होने के साथ नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में दिन के साथ रात के समय भी अधिक सतर्क रहें और नदी-नालों के आसपास जाने से परहेज करें। इसके अलावा आवश्यक न हो तो पर्वतीय इलाकों में यात्रा करने से बचें। 
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