गंगा स्वच्छता अभियान के तहत केंद्र सरकार ने अब सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी वेबकॉस को दी है।
शासन में यह उम्मीद की जा रही कै कि इस एजेंसी के काम शुरू करने के बाद ही केंद्र इस मद का पांच सौ करोड़ रुपये आवंटित करेगा, हालांकि एनजीटी ने केंद्र को गंगा स्वच्छता के लिए स्वीकृत पांच सौ करोड़ रुपये जल्दी से जल्दी जारी करने का आदेश दिया था। वेबकॉस को एसटीपी निर्माण की सूचना प्रदेश शासन को दे दी गई है। बहुत जल्दी एजेंसी की टीम मुख्य सचिव के साथ कार्ययोजना पर बैठक करेगी।
उत्तराखंड पेयजल निगम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के आदेश पर गंगा बेसिन में 15 एसटीपी और 24 बायो डायजेस्टर के निर्माण के लिए एक्शन प्लान तैयार कर लिया था, लेकिन केंद्र ने इसे खारिज कर दिया और पीपीपी मोड पर प्लांट बनाने के लिए कहा। इसके बाद कोई कंपनी पर्वतीय क्षेत्रों में एसटीपी निर्माण के लिए काम करने के लिए राजी नहीं हुई।
इस पर पीपीपी मोड को दरकिनार कर स्थानीय ठेकेदारों से काम के लिए कहा गया तो वे भी तैयार नहीं हुए। एनजीटी के बढ़ते दबाव के कारण केंद्र ने वेबकॉस से एसटीपी निर्माण कराने का निर्णय लिया है। एसटीपी निर्माण के मद में केंद्र सरकार ने अभी तक राज्य सरकार को एक पैसा नहीं दिया है।
कंपनियों के काम से मना करने की एक वजह यह भी मानी जा रही है। बाद में केंद्र ने वेबकॉस से यह काम कराने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश शासन को अवगत करा दिया गया है।
वेबकॉस की टीम शासन में बात करने के साथ गंगा बेसिन में उन स्थानों को देखेगी जहां एसटीपी बनाए जाने हैं। अपर मुख्य सचिव एस. राजू ने वेबकॉस को जिम्मेदारी दिए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कंपनी की टीम शासन से वार्ता के लिए आने वाली है।