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सरकारी वकीलों की नियुक्ति में सिफारिश पर लगाम

Thu, 11 Feb 2016 11:55 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के न्यायालयों में सरकारी सिफारिशी वकीलों के दिन अब लद गए हैं। न्याय विभाग ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत सरकारी वकील नियुक्त करने की नई नियमावली का शासनादेश जारी कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए विस्तृत सेवा शर्तें तय की गई हैं। पहली बार सरकारी अधिवक्ताओं की उम्र सीमा भी तय कर दी है।

अधिकतम आयु सीमा 67 वर्ष होगी और सरकार चाहे तो तीन वर्ष तक बढ़ा सकेगी। सरकार को लगता है कि कोई ज्यादा उम्र वाला अधिवक्ता उपयोगी है तो विशेष परिस्थितियों में स्पेशल एडवोकेट के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा।

संविधान में केवल महाधिवक्ता का ही उल्लेख है। बाकी सभी सरकारी वकील विधि अधिकारी की श्रेणी में रखे गए हैं, लेकिन वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता और उप-महाधिवक्ता का संविधान से लेकर विधि परामर्शी निर्देशिका तक में कहीं कोई जिक्र नहीं है।
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जिसकी थोड़ी भी सिफारिश रही, वही इन पदों पर बैठ गया, जिसका बोझ सरकार के खजाने पर बढ़ता गया। लेकिन अब महाधिवक्ता के अलावा सभी सरकारी वकीलों को नियुक्ति की शर्तें पूरी करनी होगी। पिछले दिनों हरियाणा से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान भी लिया था।

अब होगी यह व्यवस्था
सर्वोच्च न्यायालय में सरकारी अधिवक्ताओं के लिए
पद - पात्रता की शर्त                    
अपर महाधिवक्ता - सुप्रीम कोर्ट में दस साल की वकालत के साथ ही सुप्रीम कोर्ट या किसी भी हाई कोर्ट से सीनियर एडवोकेट डेजिगनेटेड होना चाहिए
सह स्थायी अधिवक्ता - सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित परीक्षा पास करनी होगी
वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता - सुप्रीम कोर्ट में न्यूनतम सात वर्ष की वकालत
पैनल अधिवक्ता    सुप्रीम कोर्ट में पांच वर्ष वकालत करने का अनुभव

उच्च न्यायालय में सरकारी वकीलों की नियुक्ति की सेवा शर्तें
पद - पात्रता की शर्त
वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता व अपर महाधिवक्ता - सुप्रीम कोर्ट या किसी भी हाई कोर्ट से वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में अधिकृत हो और उच्च न्यायालय में न्यूनतम दस वर्ष की वकालत हो
मुख्य स्थायी अधिवक्ता - उच्च न्यायालय में दस वर्ष तक वकालत की हो
अपर मुख्य स्थायी व स्थायी अधिवक्ता - तदैव
सहायक शासकीय अधिवक्ता - उच्च न्यायालय में सात साल की वकालत हो चुकी हो
वाद धारक - उच्च न्यायालय में पांच वर्ष की प्रैक्टिस पूरी कर ली हो

सरकार के इस फैसले से सरकारी वकीलों की नियुक्ति में पारदर्शिता आएगी और योग्य अधिवक्ताओं को मौका मिलेगा। इससे सरकार से जुड़े मामलों की पैरवी करने के लिए वकीलों पर होने वाले खर्च में कमी भी आएगी और नियुक्ति से उम्र तक के मानक तय होने के बाद परिणाम भी बेहतर आएंगे।
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- राम सिंह, प्रमुख सचिव न्याय
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