प्रथम विश्व युद्ध में उत्तराखंड के शूरवीरों ने मित्र राष्ट्रों को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
प्रथम विश्व युद्ध के शताब्दी समारोह में उत्तराखंड के शूरवीरों को याद किया गया। दिल्ली में 10 मार्च से 14 मार्च तक चलने वाले इस समारोह में अलंकृत सैनिकों को बुलाया गया है।
जिसमें प्रदेश से शौर्य चक्र से सम्मानित ब्रिगेडियर एएन बहुगुणा (रि) शामिल हुए। इस समारोह में विक्टोरिया क्रास से सम्मानित प्रदेश के ग बर सिंह नेगी और दरबान सिंह नेगी को भी याद किया गया।
प्रथम विश्व युद्ध में जिन भारतीय शूरवीरों ने मित्र राष्ट्रों को जीत दिलाई थी, उसमें उत्तराखंड के शूरवीरों भी शामिल थे। उत्तराखंड के शूरवीरों की बहादुरी का प्रमाण ब्रिटिश इंडियन आर्मी का सर्वोच्च सैन्य सम्मान विक्टोरिया क्रास है, जिससे ये नवाजे गए थे।
विश्व युद्ध में गढ़वाल राइफल्स के दो शूरवीरों राइफलमैन गबर सिंह नेगी और नायक दरबान सिंह नेगी को विक्टोरिया क्रास मिला था। सबसे बड़ी बात यह है कि अविभाजित भारत के 12 शूरवीरों को विक्टोरिया क्रास मिला था। इनमें दो उत्तराखंड के थे।
प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों की याद में आयोजित समारोह में ब्रिगेडियर एएन बहुगुणा (रि) ने बताया कि उत्तराखंड के रणबांकुरों का हर युद्ध में अहम योगदान रहा है। सेना में शामिल होना प्रदेश की परंपरा है और ऐसे वीरों से प्रेरणा पाकर बड़ी संख्या में युवा सेना में शामिल हो रहे हैं।