उत्तराखंड के किसानों की आमदनी में अब शहद की मिठास घुलेगी। मात्र आठ हजार देकर 13 जिलों में 650 किसान मौनपालन से जुड़ेंगे। मधु ग्राम योजना को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो गया है। जिसमें प्रत्येक जिले में न्याय पंचायत स्तर पर एक मधु ग्राम विकसित किया जा रहा है। उद्यान विभाग ने चयनित गांवों में किसानों को मौनबॉक्स और मधुमक्खियां देने के लिए हरियाणा की एक फर्म के साथ अनुबंध किया है।
50 किसानों को शहद उत्पादन से जोड़ा जाएगा
मधु ग्राम योजना के तहत प्रदेश के नौ पर्वतीय जिलों में चयनित गांवों में मौनपालन के लिए एपिस सिराना इंडिका मधुमक्खी दी जाएगी। जबकि चार मैदानी जिलों में एपिस मैलीफेरा मधुमक्खियां मौन बॉक्स के साथ किसानों को दी जाएगी। एक चयनित मधु ग्राम में 50 किसानों को शहद उत्पादन से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक किसान को 10 मौनपालन बॉक्स मधुमक्खी समेत दिए जाएंगे।
एक मौन बॉक्स की कीमत चार हजार रुपये हैं। जबकि केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से 80 प्रतिशत सब्सिडी यानी 3200 रुपये दिए जाएंगे। किसान से प्रति मौनबॉक्स सिर्फ 800 रुपये लिए जाएंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम खराब होने से ठंड ज्यादा है। जिससे फिलहाल पहाड़ों में चयनित गांवों में किसानों को मधुमक्खी देने का काम फिलहाल रोका गया है। मार्च महीने में मौसम साफ होने के साथ ही फ्लावरिंग भी शुरू होगी। विभाग की ओर से अगले माह किसानों को मौन बॉक्स दिए जाएंगे।
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2200 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन
उत्तराखंड में वर्तमान में 6162 मौनपालक शहद का उत्पादन करते हैं। राज्य में लगभग 2200 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया जाता है। प्रदेश में स्वरोजगार के अवसर सृजित करने और शहद का उत्पादन बढ़ाने के लिए मधु ग्राम योजना शुरू की गई। जिसमें प्रत्येक जिले में न्याय पंचायत स्तर पर एक मधु ग्राम विकसित किया जा रहा है।
ये होंगे मधु ग्राम
नैनीताल जिले में ज्योलीकोट, ऊधमसिंह नगर में बिग्रा बाग, अल्मोड़ा में असगोली, बागेश्वर में फरसाली, पिथौरागढ़ में धारचूला, चंपावत में सिप्टी, उत्तरकाशी में नाकुरी, टिहरी में बनाली, पौड़ी में चमराड़ा, चमोली में कल्याणी, रुद्रप्रयाग में ऊंचाढुंगी, हरिद्वार में मकदुमपुर, देहरादून में थानों को मधु ग्राम के रूप में चयनित किया गया है।
मधु ग्राम योजना के तहत मैदानी जिलों के चयनित गांवों में किसानों को मौन बॉक्स दिए जा रहे हैं। अगले माह से पर्वतीय जिलों में किसानों को मौन बॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के तहत किसानों को 80 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। उत्तराखंड में शहद उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। कम मेहनत से किसान अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं।
- एचसी तिवारी, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग