मिसाल हैं ये शिक्षक
शिक्षा विभाग के वे शिक्षक जो वर्षों से पहाड़ के दूरदराज के विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे हैं। इसके बाद भी वे सुगम में न आकर पहाड़ में ही बने रहना चाहते हैं। शासन, प्रशासन के उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए मिसाल हैं, जो पहाड़ में सेवा को सजा मानते हैं।
बढ़ेगी ऐसे शिक्षकों की संख्या
सुगम स्थान के बजाए पहाड़ में ही तैनाती चाहने वाले शिक्षकों की संख्या अभी बढ़ेगी। दुर्गम में तैनाती चाहने वाले 3897 शिक्षक माध्यमिक शिक्षा के हैं। अपर निदेशक बेसिक शिक्षा आरएल आर्या के मुताबिक जूनियर हाईस्कूल और प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले जिला स्तर से होते हैं। जिलों से इस तरह के शिक्षकों की सूचना अभी निदेशालय को नहीं मिली।
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कई शिक्षकों को मिलेगा लाभ
प्रदेश के वे शिक्षक जो दुर्गम और अति दुर्गम विद्यालयों से अपना तबादला नहीं चाहते। वे शिक्षक तबादलों के लिए तय किए गए 15 प्रतिशत के दायरे में नहीं आएंगे। इससे उन शिक्षकों को लाभ मिलेगा जो वर्षों से दुर्गम से सुगम में नही आ पा रहे हैं।