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Uttarakhand: देहरादून-सहारनपुर रेल लाइन परियोजना का काम तेज...बनेंगे आठ स्टेशन, लिडार सर्वे से अलाइनमेंट तय

Tue, 02 Jul 2024 11:39 AM IST
रेनू सकलानी अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

दून-सहारनपुर के बीच 112 किमी की दूरी घटकर महज 81 किमी. रह जाएगी, जबकि यह सफर डेढ़ घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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शाकंभरी देवी होते हुए देहरादून-सहारनपुर रेल लाइन परियोजना का काम तेज हो गया है। मैदान से लेकर शिवालिक की पहाड़ियों तक अत्याधुनिक तकनीक वाला ड्रोन लिडार सर्वे पूरा कर लिया गया है। सर्वे के आधार पर प्रस्तावित रेलमार्ग का अलाइनमेंट व यार्ड निर्धारण हाे चुका है। इस रूट में आठ स्टेशन प्रस्तावित हैं।

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प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कर जल्द रेल ट्रैक बिछाने के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा चुनाव में इस परियोजना की घोषणा की थी। रेललाइन के सर्वे के लिए रेल मंत्री ने 2.3 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कराया था। प्रोजेक्ट की डीपीआर 18 महीने में तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।

पहले चरण में 40 किमी. की रेललाइन बिछाना प्रस्तावित
अभी देहरादून से सहारनपुर जाने के लिए वाया हरिद्वार होकर जाना पड़ता है। नई रेललाइन बिछने से दून-सहारनपुर के बीच 112 किमी की दूरी घटकर महज 81 किमी. रह जाएगी, जबकि यह सफर डेढ़ घंटे में पूरा किया जा सकेगा। पहले चरण में सहारनपुर से शाकंभरी देवी तक 40 किमी. की रेललाइन बिछाना प्रस्तावित है।
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दूसरे चरण में शाकंभरी देवी से देहरादून के हर्रावाला तक 41 किमी. लंबी लाइन बिछेगी। यह रेलमार्ग शिवालिक की पहाड़ियों के बीच से गुजरेगा। इस रूट को बनाने में रेलवे को 11 किलोमीटर लंबी टनल और 106 छोटे बड़े पुल बनाने होंगे।

सफल रहा हाइड्रोलिक कैलकुलेशन व मृदा परीक्षण

रेल मार्ग का निर्माण हाइड्रोलिक कैलकुलेशन के बगैर संभव नहीं है। सर्वे टीम ने हाइड्रोलिक कैलकुलेशन पूरा कर लिया है, उधर जिन स्थानों पर रेल लाइन बिछाई जानी है, वहां मृदा परीक्षण का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। मैदान व शिवालिक की पहाड़ियों से लिए गए मिट्टी के सैंपल में किसी प्रकार का कोई अवरोध होने की बात सामने नहीं आई है।
 

पहले वायुयान से होता था सर्वे, अब प्रयोग हुई ड्रोन लिडार तकनीक

रेल मंत्रालय के अनुसार पहले खासकर पहाड़ी क्षेत्रों व किसी बड़े क्षेत्र के सर्वे के लिए विमान या हेलिकॉप्टर का प्रयोग होता था, लेकिन अब ड्रोन लिडार तकनीक का प्रयोग हो रहा है। यह एक रिमोट सेंसिंग तकनीक है, इसमें प्रकाश का उपयोग पल्स लेजर के रूप में किया जाता है। लिडार तकनीक से किसी क्षेत्र का सर्वेक्षण लेजर उपकरणों के माध्यम से होता है। इसमें जीपीएस और स्कैनर का भी सहयोग लिया जाता है। एक जीपीएस को ड्रोन व एक सर्वेक्षण स्थल या उसके आसपास लगाया जाता है। लिडार उपकरणों में लेज़र, स्कैनर और एक जीपीएस रिसीवर भी होता है। इस तकनीक में पृथ्वी की सतह पर लेज़र किरणें डालते हैं। प्रकाश के वापस लौटने के समय की गणना से दूरी का पता लग जाता है। इस तकनीक से संबंधित स्थल का त्रि-आयामी मानचित्र तैयार कर उसकी गहराई, चौड़ाई तथा उसके प्रवाह संबंधी जानकारी प्राप्त की जाती है।

रेलमंत्री ने देहरादून-सहारनपुर वाया शाकंभरी देवी रेल लाइन बिछाने की घोषणा की थी, यह रेल लाइन बनने से यूपी-उत्तराखंड के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इसके लिए वह रेलमंत्री से मुलाकात कर अनुरोध करेंगे कि प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ाई जाए, ताकि जल्द दोनों राज्यों के लोगों को रेल सेवा का लाभ मिल सके। -इमरान मसूद, सांसद-सहारनपुर लोकसभा

देहरादून-शाकंभरी देवी-सहारनपुर रेललाइन प्रोजेक्ट में काफी काम हो चुका है। फाइनल लोकेशन सर्वे लगभग पूरा है। इसमें रेल लाइन से लेकर यार्ड व अन्य सभी जरूरी निर्माणों के लिए स्थान चिह्ननीकरण किया गया है। इसी से रेल ट्रेक का अलाइनमेंट तय होगा। फाइनल लोकेशन चिह्नीकरण में मामूली कार्य शेष है, यह जुलाई में पूरा हो जाएगा। रेलवे मुख्यालय रिपोर्ट भेजकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। -आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम, मुरादाबाद मंडल

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प्रस्तावित स्टेशन-यार्ड

उप्र के सीमाक्षेत्र में

- पिलखनी- जंक्शन

- चिलकाना- स्टेशन

- बीबीपुर डंडौली- हाल्ट

- बेहट- स्टेशन

- मां शाकंभरी देवी- स्टेशन

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उत्तराखंड के सीमा क्षेत्र में

नयागांव- स्टेशन

सुभाषनगर- स्टेशन

हर्रावाला- जंक्शन

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