इस दौरान वे बदाली ब्रह्मखाल और कोटबागी चिन्यालीसौड़ बेसिक स्कूल में तैनात रहीं। वर्ष 2005 से वह राजकीय प्राथमिक विद्यालय मातली में प्रधानाध्यापिका के पद पर तैनात हैं।
विद्यालय में शिक्षण के साथ ही वे स्कूल के बच्चों की निजी समस्याओं को भी प्राथमिकता में रखती हैं। कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने विद्यालय के तीन बच्चों की समस्या को देखते हुए उन्हें एक संस्था की मदद से देहरादून के अनाथाश्रम में प्रवेश दिलाया।
अब ये बच्चे बेहतर शिक्षा दीक्षा पा रहे हैं। स्कूल में किताबों से पढ़ाई के साथ ही उनका फोकस खेलकूद, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों पर भी रहता है। उनके स्कूल के बच्चे निरंतर जनपद एवं राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।