उत्तराखंड शिक्षा विभाग में सिफारिशी शिक्षकों का बोलबाला कायम है।
एलटी से प्रवक्ता के पद पर प्रमोशन के बावजूद दूरदराज के स्कूलों में जाने से इनकार कर चुके करीब 40 शिक्षकों को नियमावली को ताक पर रखकर दुर्गम में मनचाहे स्कूलों में भेजने के आदेश शासन की तरफ से दिए गए हैं। इसके बाद दुर्गम स्कूलों का रुख करने वाले करीब 800 शिक्षक ठगा महसूस कर रहे हैं।
ऐसा नहीं करने पर प्रमोशन होगा निरस्त
31 अक्तूबर 2013 को शिक्षा विभाग में 1382 शिक्षकों को सहायक अध्यापक से प्रवक्ता के पद पर प्रमोशन देकर दूरदराज के स्कूलों में भेजा गया था। इन शिक्षकों को दो सप्ताह में नए तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने का आदेश दिया गया था। कहा गया था कि ऐसा नहीं करने पर प्रमोशन निरस्त माना जाएगा।
करीब 800 शिक्षकों ने तो कार्यभार ग्रहण कर लिया, लेकिन कई शिक्षक मनचाहा स्कूल नहीं मिलने पर जुगाड़बाजी में लगे रहे। नियम यह है कि कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों को तीन साल तक दुबारा प्रमोशन नहीं दिया जा सकता।
अब करीब 40 शिक्षकों को अति दुर्गम एवं विशिष्ट दुर्गम के मनचाहे स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए हैं। बाकी शिक्षक जो जुगाड़ नहीं लगा सके उन्हें नियमानुसार प्रमोशन के लिए इंतजार करना होगा।
कुछ शिक्षक प्रमोशन पाकर दुर्गम स्कूलों में नहीं जा सके थे। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, अब शिक्षकों की सुविधा को देखते हुए उन्हें ई एवं एफ श्रेणी के विद्यालयों में भेजने पर सहमति बनी है। हालांकि इससे उन शिक्षकों में नाराजगी होगी जो पूर्व में विभाग के आदेश को मानते हुए दूरदराज के स्कूलों में कार्यरत हैं।
- एमसी जोशी, शिक्षा सचिव
शासन ने एलटी से प्रवक्ता बने शिक्षकों की पदोन्नति संशोधित करते हुए उनकी तैनाती के आदेश दिए हैं। अभी परीक्षाएं चल रही हैं, पांच अप्रैल तक इन शिक्षकों को प्रमोशन (संशोधित पदों पर) के पदों पर भेज दिया जाएगा।
- राकेश कुंवर, शिक्षा निदेशक