अमीर अहमद ने बताया कि प्रोफेसर महेंद्र पंत के कहने पर वे ऋषिकेश से बस पकड़कर उनके आश्रम पहुंचे। रात को वहीं रुके और पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा से बातें करने का मौका मिला। जब उन्होंने पेड़ों की फोटो और अन्य साक्ष्य सौंपे तो उन्होंने पूछा था कि पेड़ किस चीज से काटे जा रहे हैं।
जब अमीर अहमद ने बताया कि कुल्हाड़ी और आरी से पेड़ काटे जा रहे हैं तो उन्होंने पूछा कि तुमने देखा था कि पेड़ पर किस तरह से आरियां चल रही हैं। उन्होंने हां में जवाब दिया तो बहुगुणा ने केंद्रीय मंत्री को चिट्ठी लिखी। अगले दिन सुबह फोन पर उनसे बात भी की।
अमीर अहमद बताते हैं कि प्रोफेसर महेंद्र पंत होली की छुट्टियों में छात्रों को उत्तरकाशी, जोशीमठ, हर्षिल आदि जगहों पर ले जाते थे और कुदाल से चट्टानें काटकर उनमें पेड़ लगाते थे, ताकि भूस्खलन न हो सके। इसी दौरान उनकी मुलाकात पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा से होती थी।