पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन कर रहे राज्य कर्मचारी लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने विधायकों, सांसदों से लेकर भगवान बदरी-केदार और देवी देवताओं के दरवाजे पर फरियाद लगाने का फैसला किया है।
उनके इस चरणबद्ध आंदोलन में राज्य के करीब 40 कर्मचारी संगठन भी कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। जनप्रतिनिधियों से आंदोलन का समर्थन हासिल करने के बाद वे मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध करेंगे कि वे विधानसभा सत्र के दौरान पेंशन बहाली को लेकर एक प्रस्ताव कर केंद्र सरकार को भेजें।
पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर वर्ष 2005 से शुरू हुई अंशदायी पेंशन योजना के विरोध में राज्य कर्मचारी आवाज उठा रहे हैं। सरकारी सेवा में जैसे जैसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है, नई पेंशन योजना के विरोध में स्वर तेज हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन के तहत चल रहे आंदोलन को राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।
आंदोलन का प्रदेश नेतृत्व चरणबद्ध ढंग से जिला पंचायतों, नगर निगमों के मेयरों, विधायकों, सांसदों के दरवाजे पर दस्तक देगा। उनसे पुरानी पेंशन बहाली के लिए समर्थन मांगेगा। इस दौरान देवी देवताओं के मंदिरों और चारों धामों में कर्मचारियों के समूह फरियाद लगाने जाएंगे। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर उनसे विधानसभा में पेंशन बहाली के समर्थन में प्रस्ताव पारित करने की मांग की जाएगी।
राज्य सरकार में अंशदायी पेंशन योजना से जुड़े हजारों कर्मचारी है। ये सभी सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंतित है। नई पेंशन योजना शेयर बाजार से जुड़ी है। इसमें बहुत बड़ा जोखिम है। कर्मचारी आशंकित हैं कि सेवानिवृत्ति के समय यदि बाजार की स्थिति ठीक न रही तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होगा। इसलिए सरकार से पुरानी पेंशन योजना को बहाल कराने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
- जीतमणि पैन्यूली, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन
पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग को परिषद ने अपने एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के साथ हुई वार्ता के बिंदुओं में यह मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। यह बहुत गंभीर मुद्दा है, सरकार को इस पर निर्णय लेना चाहिए।
- अरुण पांडेय, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद
मंच पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन के समर्थन में है। सरकार को इस बारे में विचार करना चाहिए। ये कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मसला है। हमने अपने मांग पत्र में पुरानी पेंशन बहाली को प्रमुखता शामिल किया है। -
पूर्णानंद नौटियाल, प्रदेश प्रवक्ता, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच
संगठन ने भी पुरानी पेंशन आंदोलन के समर्थन में चिट्ठी लिखी है। हमारी सरकार से मांग है कि वह विधानसभा में प्रस्ताव लाकर पुरानी पेंशन आंदोलन का समर्थन करे। यह हजारों कर्मचारियों के भविष्य का सवाल है। -
पंचम सिंह बिष्ट, प्रदेश महामंत्री, उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन