प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना को लागू करने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। पहले चरण में योजना के तहत प्रत्येक ब्लाक में 10 हेक्टेयर भूमि पर क्लस्टर बना कर एक आदर्श गांव विकसित किया जाएगा। जहां पर कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य, पोल्ट्री, शहद, मशरूम, डेरी समेत अन्य कार्य किए जाएंगे।
प्रदेश में लगभग सात लाख हेक्टेयर पर खेती किसानी का काम होता है। जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 12 प्रतिशत है। जबकि प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। प्रदेश में खाली हो रहे गांव और बंजर हो रही कृषि भूमि को देखते हुए सरकार ने एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना लागू करने की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पहले चरण में प्रत्येक ब्लाक में एक गांव का चयन किया जाएगा। जहां पर 100 किसानों का समूह बना कर कृषि कार्य किए जाएंगे। वित्तीय 2020-21 में योजना के संचालन को 14.25 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
15 करोड़ का रिवाल्विंग फंड बनेगा
योजना को लागू करने के लिए सरकार की ओर से 15 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड बनाया जाएगा। इस फंड से प्रत्येक समूह को 15 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। क्लस्टर से सालाना प्राप्त होने वाली आय का 60 प्रतिशत समूह के सदस्यों में बांटा जाएगा। 35 प्रतिशत हिस्सा समूह के खाते में जमा किया जाएगा। पांच प्रतिशत राशि प्रशासनिक कार्यों के लिए खर्च की जाएगी।