13 मई को शीतल 6300 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-2, 14 मई को 7400 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-3 और 15 मई को 8000 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-4 पहुंचीं। इसी दिन रात 9 बजे एवरेस्ट फतह के लिए निकल गईं थी। शीतल के कोच योगेश गर्ब्याल ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह 6 बजे शीतल ने एवरेस्ट फतह कर ली।
वह कैंप-4 वापस लौट आईं हैं। 7 बार के एवरेस्ट विजेता लवराज धर्मशक्तू, नंदा देवी चोटी को फतह करने वाली विश्व की पहली महिला चंद्रप्रभा ऐतवाल को आदर्श मानने वाली शीतल अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता सपना देवी को देती हैं, जिन्होंने विषम परिस्थिति में उनका साथ दिया।
शीतल की लगन, मेहनत और उसके जुनून को देखते हुए कई कंपनियों ने इस अभियान को पूरा करने में उनका साथ दिया। शीतल ओएनजीसी की स्कॉलर हैं। एवरेस्ट अभियान में उनको द हंस फाउंडेशन, सनपेट, एयूकेएमएस, सुपरटैक, क्लिफ क्लाइंबर्स, आईएलसी पिथौरागढ़, वोलांगोंग आस्ट्रेलिया के भारतीय समूह के साथ ही और कई कंपनियों का सहयोग मिला है।