अमर उजाला की मंशा है कि इन ऑडियो क्लिपिंग की जांच हो, ऐसे शख्स का पर्दाफाश और कानूनी कार्रवाई हो ताकि ऐसा कोई भी शख्स सरकार और सीएम को अपने जेब में न समझे। अमर उजाला ने इन ऑडियो क्लिपिंग को सुना, जिसमें कई हैरान करने वाली बातें सामने आईं। इन अलग-अलग ऑडियो में जितना वार्तालाप है, उसे आप ऑडियो में सुन सकते हैं।
22 साल से रात दिन का साथ है
...मुख्यमंत्री से 22 साल से रात दिन का साथ है। ‘2007 में किसमें हिम्मत थी, 220 डीआईडी डीजल गाड़ी किसके लिए ली गई थी। इनके लिए ली गई थी। एंडेवर आज भी हमारी खड़ी है, किसके लिए ली गई, इनके लिए।
सीएम ओब्लाइज्ड है और ओब्लाइज्ड रहेंगे
देखिए हम जो भी कर रहे हैं, सीएम को ओब्लाइज्ड करने के लिए कर रहे हैं (सीएम के कथित दोस्त से बात कर रहा व्यक्ति)। जवाब में शख्स कहता है, ‘देखो सीएम ओब्लाइज्ड है और वो ओब्लाइज्ड रहेंगे। उन्हें पता है रोटी बनाकर खिलाई हुई है। वो और मैं सुबह दोनों वहीं बैठे रहते थे। पानी पर पत्थर मारते थे, बंदूक लेकर निशाना लगाते रहते थे।
मुझे बेनिफिट ये है, सुबह खेलते हुए बात कर लेता हूं
...मेरे लिए सीएम से बात करना बहुत सहज है। ‘हमें बेनिफिट यह है कि सुबह खेलते हुए भी भाईसाहब से बात कर लेते हैं। जब हम उनको (अधिकारियों को) फोन करते हैं और कहते हैं कि भाईसाहब से बात हो गई, उन्होंने कहा कि ये मीटिंग रखी है तो फिर वे (अधिकारी) कुछ नहीं कह पाते।
सीएम ताऊ हैं, अब नहीं लेगा तो कब लेगा नाम
...एक दिन मेरे बेटे को चालान वालों ने पकड़ लिया था। बेटे ने सीएम को बोल दिया। पुलिस वालों को उधर से फोन आ गया। अगर उसके ताऊजी मुख्यमंत्री हैं, तो नाम क्यों नहीं लेगा। अब नहीं लेगा तो कब लेगा ?
सीएम के बेस पर मैं ही फोन कर दूंगा
सब मुझ पर छोड़ दो। सीएम के पास कोई टाइम होता है कि क्या करना है या क्या नहीं। उनके बेस पर मैं ही फोन कर दूंगा, सीएम साहब ने बोला है... इनसे बात करके परमिशन ले लूंगा।
मैंने ही उस आईपीएस अफसर को अहम पद पर लगवाया
ये शख्स दावा करता है कि एक आईपीएस अफसर ने उसके घर के बहुत चक्कर काटे। उसी ने इस अधिकारी को अहम पद दिलवाया। आगे डीजीपी भी बनवा देगा।
धीरेंद्र ओएसडी बना तो मेरी वजह से
धीरेंद्र यदि ओएसडी बना है तो मेरी वजह से। ‘धीरेंद्र नौकरी कर रहा है और मैं फ्री में नौकरी कर रहा हूं। उसको देख मैं ही रहा हूं। उसको ऊपर से निर्देश हैं कि कहां चलना है, क्या करना है, क्योंकि वो गऊ है। वो दरवाजा भी खोलेगा और अटैची भी निकालेगा। मैं तो नौकरी कर नहीं सकता।’
कौन पूछ रहा है भतीजे को
उनके भतीजे को कौन पूछ रहा है, भाईसाहब ने तो कभी नहीं पूछा। दारू पी रहे हैं। जुआ खेल रहे हैं। वो इतना बड़ा है तो काम करा कर दिखा दे। ‘वो तो छोटे-मोटे अधिकारियों को डांट कर पैसा कमा रहे हैं।
भाईसाहब मुझसे खुले हुए हैं
‘भाईसाहब मुझसे खुले हुए हैं, तुमसे पैसा भी लेना होगा, तो मैं दिलवा सकता हूं। भाईसाहब बाहर दुनिया में किसी और से वो नहीं कर सकते।
वो भी अकड़ू हैं तो मैं भी अकड़ू हूं
वो शख्स कहता है, ‘कभी पूछना इन लोगों से। किसी से बात ही नहीं करते। बहुत अकड़ू हैं, मैं भी अकड़ू हूं।
ओवर ऑल सिक्योरिटी, मेरा ही लाया हुआ आदमी है
‘सीएम के यहां मोबाइल से फोटो खींचना अलाउड नहीं है। इसलिए फोटोग्राफर रखा हुआ है। वो तो लिहाज है हमारा कि हम खींच रहे। वरना सिक्योरिटी तो एकदम से मोबाइल ले लेती। यहां का ओवर ऑल सिक्योरिटी, ये समझ लो कि मेरा ही लाया हुआ आदमी है।’