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उत्तराखंड: वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी बीएल सकलानी का निधन, वेंटिलेटर की सुविधा न देने का आरोप

Sun, 13 Sep 2020 08:38 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • दो दिन पहले ही संग्रहालय की मांग को लेकर खुद को शहीद स्मारक में कर लिया था बंद
  • शनिवार को सांस लेने में दिक्कत होने पर दून अस्पताल में कराए गए थे भर्ती, रात में निधन
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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देहरादून में दो दिन पहले शहीद स्मारक में खुद को बंद कर आत्महत्या की कोशिश करने वाले वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी बीएल सकलानी का निधन हो गया। सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें शनिवार सुबह दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां रात करीब साढ़े नौ बजे उनका निधन हो गया। रायपुर श्मशान में उनका अंतिम संस्कार किया गया। आंदोलनकारी सकलानी के निधन से राज्य आंदोलनकारियों ने शोक जताया है। 

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राज्य आंदोलन में उनका बड़ा योगदान रहा। राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदीप कुकरेती ने बताया कि आंदोलन के लिए सबसे पहले तीन दिवसीय सम्मेलन शहंशाही आश्रम स्थित उनके आवास में हुआ था। उन्होंने राज्य आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों को संजोकर रखा है। जिनके लिए वह राज्य सरकार से संग्रहालय बनाने की मांग कर रह थे। इसी मांग को लेकर उन्होंने दो दिन पहले खुद को शहीद स्मारक में बंद कर जान देने की कोशिश की थी। वह अपने पीछे बेटे चिंतन सकलानी, भाई देवेंद्र दत्त सकलानी, राकेश सकलानी सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। 

संग्रहालय बनाने की मांग पूरी करें सरकार 
आंदोलनकारी बीएल सकलानी की निधन की खबर सुनकर राज्य आंदोलनकारियों में शोक की लहर दौड़ गई है। राज्य आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, ओमी उनियाल, रामलाल खंडूरी, जगमोहन नेगी, अमर सिंह, सुरेश कुमार, सतेंद्र नौगाई, हरीश पाठक, प्रमिला राव, निर्मला बिष्ट, नवनीत गोसाईं, गणेश डंगवाल, विनोद असवाल, राकेश नौटियाल, प्रभात, जयदीप सकलानी, वेदानंद कोठारी, प्रवीन गुसाईं, सहित कई आंदोलनकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि 15 साल से संग्रहालय बनाने और अलग राज्य आंदोलन के इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की उनकी मांग को पूरा किया जाए।  
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वेंटिलेटर की सुविधा न देने का आरोप
वरिष्ठ आंदोलनकारी बीएल सकलानी के परिजनों और राज्य आंदोलनकारियों ने रात में समय पर वेंटिलेटर की सुविधा न मिलने का आरोप लगाया है। परिजनों और राज्य आंदोलनकारी मंच के जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती का कहना है कि इस वजह से ही सकलानी की मौत हुई है। इस संबंध में दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि उन्होंने वरिष्ठ आंदोलनकारी का उपचार करने वाले डॉक्टरों से पूरी जानकारी हासिल की है। डॉक्टरों ने बताया कि जिस वक्त मरीज को अस्पताल लाया गया था, उनकी तबीयत बहुत खराब थी। ऑक्सीजन लेवल भी अत्यधिक कम था। पहले इमरजेंसी वार्ड में ही उन्हें ऑक्सीजन दी गई। इसके बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो तत्काल आईसीयू में भर्ती कराकर वहां भी ऑक्सीजन दी गई। डॉक्टरों ने हर संभव इलाज देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वेंटिलेटर न मिलने से मौत की बात का कोई आधार नहीं है।  

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