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उत्तराखंड में स्कूल खोलने का फरमान: बच्चों की पढ़ाई की चिंता, पर जीवन संकट में कैसे डालें

Fri, 30 Jul 2021 01:53 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

कोरोना के चलते बीते साल से बच्चों की पढ़ाई खासा प्रभावित हुई है, जिसे लेकर अभिभावकों ने चिंता जाहिर की है।
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school - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकार की ओर से दो अगस्त से स्कूल खोले जाने की घोषणा के बाद अभिभावकों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। किसी ने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार किया तो किसी ने कोविड गाइडलाइन के तहत स्कूल खोले जाने का समर्थन किया।

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कोरोना के चलते बीते साल से बच्चों की पढ़ाई खासा प्रभावित हुई है, जिसे लेकर अभिभावकों ने चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि बच्चों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती है, लेकिन इस तरह घर पर रहने से बच्चों की पढ़ाई भी संकट में है।

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सरकार का फैसला कुछ हद तक सही है। बच्चों की पढ़ाई बीते साल से बहुत प्रभावित हुई है, लेकिन सरकार को इस बात पर भी मंथन करना चाहिए कि बच्चों को भी जल्द से जल्द कैसे वैक्सीन लगाई जा सके। कहीं ऐसा न हो कि तीसरी लहर से पहले सरकार का यह फैसला गलत हो जाए। अभिभावक अपने बच्चों का जीवन संकट में नहीं डाल सकते। 
- अनीता जायसवाल, लक्खीबाग

उत्तराखंड: स्कूल खोलेगी सरकार पर कोविड का खतरा बरकरार, पक्ष में नहीं अधिकतर अभिभावक

बच्चों की पढ़ाई की चिंतित है, लेकिन मैं अपने बच्चे को बिल्कुल नहीं भेज सकती। मेरे लिए मेरा बच्चा पहले है, वो भी जब हम तीसरी लहर के आने को लेकर चिंतित हैं। गाइडलाइन की बात कितनी भी कर ली जाए, लेकिन हम सभी देख रहे हैं कि गाइडलाइन का कितना पालन किया जा रहा है। क्लास में पूरा समय मास्क के साथ बैठना बच्चों के लिए बहुत मुश्किल है। 
- संध्या जैन, गांधीग्राम

सरकार ने बहुत अच्छा फैसला लिया है। हमने भी स्कूल खोले जाने के लिए सरकार को पत्र लिखा था। इतने लंबे समय से स्कूल बंद होने से अभिभावक भी परेशान थे। बच्चों की पढ़ाई का स्तर भी बहुत घट रहा था। ऑनलाइन पढ़ाई इतने लंबे समय तक संभव नहीं है। बच्चे भी ऑनलाइन पढ़ाई से बहुत ज्यादा नहीं समझ पा रहे हैं। स्कूल खुलेंगे तो कोविड गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा। - प्रेम कश्यप, अध्यक्ष, स्कूल प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव एसोसिएशन

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बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर संशय में अभिभावक

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच सरकार के स्कूल खोलने के फैसले को लेकर ऊधमसिंह नगर में कुछ अभिभावक पक्ष में तो कुछ का कहना है कि अभी स्कूल खोलना जल्दबाजी होगा। जिले में निजी स्कूल संचालक स्कूल खोलने की तैयारियों के साथ ही सरकार की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल संचालक बच्चों को बुलाने से पहले अभिभावकों की अनुमति भी मांगेंगे। इधर, सरकारी स्कूलों में अभी तक सैनिटाइजेशन और कोरोना से बचाव के उपकरणों के अभाव में तैयारियां अधूरी ही नजर आ रही हैं।

पिथौरागढ़ : स्कूल खोलने पर अभिभावक-शिक्षाविद् एकमत नहीं 
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका से भयभीत अधिकतर अभिभावक बच्चों को अभी स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सरकार ने सभी चीजें खोल दी हैं तो स्कूलों को खोलने में कोई बुराई नहीं है। स्कूलों को कोरोना की गाइड लाइन के अनुसार खोला जाना चाहिए। अभी शासन से स्कूल खोलने का आदेश नहीं है आया, लेकिन विभाग ने जिला शिक्षाधिकारियों, उपशिक्षाधिकारी, खंड शिक्षाधिकारी और प्रधानाचार्यों को कोविड गाइड लाइन के तहत स्कूल खोलने के निर्देश दे दिए हैं। सभी स्कूलों को सैनिटाइज कराया जाएगा। प्रत्येक कक्षा में सैनिटाइजर रखा जाएगा। बच्चों का तापमान नापा जाएगा। 

चंपावत : स्कूल खोलने के पक्ष में सभी 
कोरोना काल के चलते लंबे अंतराल के बाद दो अगस्त से स्कूल खोलने के सरकारी फरमान से शिक्षाविद से लेकर ज्यादातर अभिभावक तक सहमत हैं। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कैलाश चंद्र लोहनी का कहना है कि ऑफलाइन पढ़ाई सावधानी के साथ शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं है। जब दूसरी तमाम गतिविधियां हो रही हैं, तो स्कूलों को लेकर ही दुविधा क्यों? सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि स्कूलों में थर्मल स्कैनिंग, मास्क, सैनिटाइजेशन से लेकर सामाजिक दूरी और कोविड के अन्य नियमों की पड़ताल प्रवेशद्वार पर ही की जाएगी। जरूरत होने पर दो पालियों में स्कूल खोले जाएंगे। अब 70 प्रतिशत से अधिक अभिभावक भी स्कूल खोले जाने के हिमायती हैं।

अल्मोड़ा : कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए कक्षाएं हों संचालित 
बच्चों और अभिभावकों ने सरकार के स्कूल खोलने के फैसले को सही ठहराया है। अभिभावकों कहना है कि कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए कक्षाएं संचालित होनी चाहिए। शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसर और कक्षों को सैनिटाइज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी एचबी चंद ने जिले के राजकीय स्कूलों में सेंसर युक्त सैनिटाइज मशीन लगाए जाने के आदेश दिए हैं। यहां कक्षाओं में 50 फीसदी बच्चे ही बैठाएं जाएंगे। 

बागेश्वर : विद्यालय खोलने के निर्णय का अभिभावकों और छात्र-छात्राओं ने किया स्वागत
प्रदेेश सरकार ने दो अगस्त से कक्षा छह से 12वीं तक की कक्षाओं के संचालन करने कि निर्णय का जिले के अभिभावकों और छात्र-छात्राओं ने स्वागत किया है। लंबे समय से विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ा है। जिले में कई स्थानों पर नेटवर्क की समस्या होने के कारण ऑनलाइन शिक्षा में दिक्कत हो रही है। बच्चों को कक्षा में पढ़ाई के दौरान जितना सीखने को मिलता है, ऑनलाइन पढ़ाई में समझ नहीं आ रहा है। 

नैनीताल : स्कूल तैयार, अभिभावक असमंजस में 
सरकार के छह से 12वीं तक के स्कूलों को खोलने के आदेश पर स्कूल प्रबंधन तैयार हैं, जबकि अधिकतर अभिभावक असमंजस में है। इन लोगों का कहना है कि देश में कोरोना के मामले में बढ़ने लगे हैं और तीसरी लहर की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में अभी से बच्चों का स्कूल भेजना ठीक नहीं होगा सरकार को इस विषय में गंभीरता से सोचना चाहिए। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश भगत का कहना है कि स्कूल खोलने के लिए हम तैयार हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि स्कूल खोलने की एसओपी अभी तक नहीं मिली है। पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज खत्री का मानना है कि स्कूल खुलने चाहिए क्योंकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूल दो पालियों में चलने चाहिए और कोविड गाइडलाइन का ईमानदारी से पालन होना चाहिए।
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