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स्कूल खोलने का फरमान : 10 लाख बच्चों की कैसे होगी सुरक्षा श्रीमान, तैयारियों का होगा इम्तिहान

Fri, 30 Jul 2021 01:43 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

विशेषज्ञों की मानें तो स्कूल खोलने का फैसला गलत नहीं है। लेकिन बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए स्कूलों में किस तरह की इंतजाम किए गए हैं। इसे लेकर सतर्क और निरंतर निगरानी होनी चाहिए।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को संक्रमण से बचाने और रोकथाम के लिए सरकार तैयारी में जुटी है। वहीं, बच्चों के लिए स्कूलों के द्वार खोल दिए हैं। कोरोना का खतरा टला नहीं है। ऐसे में स्कूलों में बच्चे संक्रमण से बचाव के लिए कोविड के अनुरूप व्यवहार को अपना पाएंगे।

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विशेषज्ञों की मानें तो स्कूल खोलने का फैसला गलत नहीं है। लेकिन बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए स्कूलों में किस तरह की इंतजाम किए गए हैं। इसे लेकर सतर्क और निरंतर निगरानी होनी चाहिए। प्रदेश में कोरोना का पहला संक्रमित मामला 15 मार्च को मिला था। जिसके बाद संक्रमितों का ग्राफ बढ़ता गया।

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पहली लहर में कोरोना संक्रमण काबू में आने के बाद सरकार ने स्कूल खोलने का फैसला लिया था। लेकिन स्कूलों में बच्चों और अध्यापकों के संक्रमित होने पर फिर से स्कूल बंद करने पड़े। कोरोना की दूसरी लहर धीमी होने पर सरकार ने दो अगस्त से 6 से 12 कक्षा तक स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। एक तरफ सरकार व स्वास्थ्य विभाग कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को संक्रमण से बचाव व उपचार की तैयारियां कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ स्कूल खोलने का फैसला लिया है।

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केंद्र के दिशा-निर्देशों पर कोरोना की संभावित तीसरी लहर की रोकथाम के लिए प्रदेश में तैयारियां की जा रही है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में संक्रमित बच्चों का डाटा और वर्तमान संक्रमण दर का अध्ययन करने के बाद ही सरकार ने स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। स्कूलों में संक्रमण से बचाव के लिए कोविड नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन की नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। तीसरी लहर की कोई समयावधि तय नहीं है। अभी संभावनाएं जताई जा रही है। बच्चों का मानसिक और बौद्धिक विकास भी जरूरी है।
-डा. पंकज कुमार पांडेय, सचिव स्वास्थ्य

स्कूल खोलने का निर्णय गलत नहीं है। लेकिन इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा कि बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए क्या तैयारियां है। साथ ही नियमित रूप से मॉनिटरिंग होनी चाहिए। तीसरी लहर कब आएगी। यह तय नहीं है। स्कूल खोलने के लिए तीसरी लहर आने और समाप्त होने का इंतजार नहीं कर सकते हैं। स्कूल बंद होने से बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। इस बात को भी ध्यान में रखना होगा।
-अनूप नौटियाल, अध्यक्ष सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी  फाउंडेशन

दूसरी लहर में कम बच्चे हुए संक्रमित

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोरोना की पहली लहर में 0 से 9 आयु वर्ग में 2.1 प्रतिशत बच्चे संक्रमित पाए गए। जबकि 10 से 19 आयु वर्ग में 8.4 बच्चे संक्रमित हुए। वहीं, दूसरी लहर में 0 से 9 आयु वर्ग में 1.7 प्रतिशत और 10 से 19 आयु वर्ग में 7.6 प्रतिशत बच्चे ही संक्रमित मिले हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड नियमों का पालन जरूरी : प्रोफेसर रविकांत  
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के मुताबिक अगर अभिभावक और शिक्षक दोनों का वैक्सीनेशन हुआ है तो स्कूली बच्चों के संक्रमित होने की संभावना कम हो जाती है। हालांकि मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोविड नियमों का पालन करना जरूरी है।

इन नियमों का रखे ध्यान
- बच्चों को मास्क पहनाएं, स्वयं भी मास्क पहनें
- स्कूल परिसर और बस का समय-समय पर सैनिटाइजेशन होना चाहिए
- वैक्सीनेशन कराने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को ही स्कूल में आने की अनुमति दी जाए
- कक्षा के दौरान बच्चों के बीच सोशल डिस्टेंस बना कर रखा जाए
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स्कूल खुलने का तनाव न लें, बस सावधानी बरतें

मनोवैज्ञानिक मेजर डा. नंदकिशोर ने बताया कि बदली हुई परिस्थितियों में सरकार ने जो भी फैसला लिया, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। कुछ बच्चों को यह लग सकता है कि अगर परीक्षा होती तो शायद ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। यह पढ़ने वाले बच्चों की सोच है। वहीं, जो पढ़ने में कमजोर हैं, उनके लिए यह मौका है।

बच्चों को अपने भीतर संतुष्टि का भाव लाना होगा। तभी वो रिजल्ट के तनाव से मुक्त रह सकते हैं। बच्चों को समझना चाहिए कि उनके लिए बेहतर फैसला लिया गया है। खुद को सकारात्मक बनाए रखें। जिस चीज में आप बदलाव नहीं कर सकते, उनको स्वीकार करें। अंक सब कुछ निर्धारित नहीं कर सकते। सामाजिक दायरा बढ़ाएं और तनाव मुक्त रहने का प्रयास करें।

फाइव सी (पांच सी) से तनाव से निपटें:
केयर (ध्यान) - अपनी और अपने परिजनों की केयर करें। खाना हमेशा ताजा और हल्का करें। नींद पूरी लें। तनाव मुक्त रहने के लिए संगीत, टहलना, व्यायाम, योग या अपनी पसंद के काम करें। नशे से पूरी तरह दूर रहें। मोबाइल पर बहुत ज्यादा समय न बिताएं।

कंटिन्यूटी (निरंतरता) - घर में रहते हुए परिजनों से अपने मन की बात करें। दोस्तों के साथ समय गुजारें और खुश रहने का प्रयास करें। संपर्क बनाए रखें।

कंपेशन (सकारात्मक सोच )- अपने घर, परिवार, रिश्तेदार, परिचितों के लिए अच्छा सोचें। भावनात्मक रूप से मजबूत और संवेदनशील बनें।

क्रिएटिविटी (रचनात्मकता)- तनाव मुक्त रहने के लिए बागवानी, साइकिलिंग करें।

कंट्रोल (नियंत्रण)- तनाव के साथ कोरोना से बचाव के लिए कंट्रोल जरूर करें। अपने खान-पान, बाहर निकलने, घूमने के दौरान कंट्रोल बनाएं रखें। रिजल्ट को लेकर खुद पर नियंत्रण बनाए रखें। गहरी और लंबी सांसें लें, जो आपको सामान्य रखने में मदद करते हैं।
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