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हरिद्वार: करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की कार्रवाई, सेवानिवृत्त सहायक समाज कल्याण अधिकारी गिरफ्तार

Thu, 14 Oct 2021 08:14 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार

सार

छात्रों के नाम पर साढे़ तीन करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में तत्कालीन सहायक समाज कल्याण अधिकारी मुनीष कुमार त्यागी को गिरफ्तार किया गया है।
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सहायक समाज कल्याण अधिकारी गिरफ्तार - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही स्पेशल इंविस्टगेशन टीम (एसआईटी) ने सेवानिवृत्त सहायक जिला समाज कल्याण अधिकारी मुनीष कुमार त्यागी को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी की जांच में सामने आया कि जिन शिक्षण संस्थानों के खाते में साढ़े तीन करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई, वह फर्जी तरीके से केवल कागजों में ही थी। 

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छात्रवृत्ति घोटाले की जांच अधिकारी योगेश सिंह देव ने बताया कि जिला समाज कल्याण विभाग के दस्तावेजों के अनुसार साढे़ तीन करोड़ रुपये मानव भारती विश्वविद्यालय सोलन हिमाचल प्रदेश के बैंक खातों में दिया जाना दिखाया गया। जबकि विवि की ओर से ऐसी कोई राशि मिलने से इनकार किया गया। बैंक खातों की डिटेल निकाली तो यह धनराशि सुभाष निवासी ग्राम पनियाला रुड़की,  किरण देवी  निवासी ग्राम पनियाला रुड़की संचालक किरन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, राहुल विश्नोई निवासी मनीराम रोड ऋषिकेश संचालक मानव भारती विश्वविद्यालय एन पावर एकेडमी रानीपुर मोड़ हरिद्वार और अश्वनी टंडन निवासी 166 आवास विकास कोतवाली गंगनहर रुड़की के खातों में गई। 

उक्त शैक्षणिक संस्थानों की मानव भारती विश्वविद्यालय सोलन हिमाचल प्रदेश से मान्यता/संबद्वता फर्जी पाई गई। तीनों संस्थान वास्तविक रूप से धरातल पर नहीं पाए गए। छात्रों के नाम पर साढे़ तीन करोड़ रुपये की स्कालरशिप घोटाले में तत्कालीन सहायक समाज कल्याण अधिकारी मुनीष कुमार त्यागी निवासी मोहल्ला विनीत नगर गली नंबर 3 निकट महीपाल की कोठी पनियाला रोड रुड़की को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में पूर्व में जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। 
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कर्मकार बोर्ड के चार अधिकारियों को चार्जशीट से हड़कंप
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के चार अधिकारियों पूर्व सचिव दमयंती रावत, ईएसआई के डॉ. आकाशदीप, चीफ फार्मासिस्ट बीएल सेमवाल, कार्यालय सहायक नवाब सिंह को चार्जशीट देने के मामले में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में मंत्री हरक का कहना है कि जब कोई अनियमितता या घोटाला हुआ ही नहीं तो आरोप या आरोप पत्र का कोई मायना नहीं है।

दरअसल, कोटद्वार में ईएसआई अस्पताल के लिए कर्मकार बोर्ड से बतौर ऋण 20 करोड़ रुपये जारी हुए थे। इस पर नए बोर्ड अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल के आने के बाद जांच हुई थी, जिस पर अनियमितता के आरोप लगे थे। नए बोर्ड ने ईएसआई से यह पैसा वापस ले लिया था। कर्मकार बोर्ड के ऐसे ही मामलों में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर हुई थी, जिस पर सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर स्वीकार किया है कि कहीं कोई अनियमिता या घोटाला नहीं हुआ है।

चार्जशीट जारी होने के बाद मामले में मंत्री हरक का कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री के अनुमोदन के बाद कोटद्वार मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के लिए शासनादेश जारी हुआ। इसके बाद नियमानुसार ही बोर्ड से ईएसआई को पैसा दिया गया था। बाद में वह पूरा पैसा वापस भी ले लिया गया। जब सब कुछ पारदर्शिता के साथ हुआ तो घोटाला कैसा? घोटाले के आरोप कैसे? आरोप पत्र कैसा? उन्होंने कहा कि कुछ लोग बेवजह इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं। कर्मकार बोर्ड में सभी काम पूरी पारदर्शिता के साथ हुए हैं।
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