उत्तराखंड में पंडों-पुरोहितों को सरकारी पैसे की दरकार नहीं है। तभी तो समाज कल्याण विभाग को पुरोहित पेंशन योजना की बोहनी करने के लिए एक भी पुरोहित नहीं मिला।
इसके अलावा किसी मौलवी और पादरी ने भी पेंशन के लिए आवेदन नहीं किया है। लेकिन योजना में मुख्यमंत्री हरीश रावत की दिलचस्पी होने से विभागीय अफसर परेशान हैं।
अब जिलाधिकारियों से कहा जा रहा है कि पात्रों को ढूंढकर योजना का फार्म भरवाएं। योजना अप्रैल 2014 से लागू है। अधिकारियों का कहना है कि देवभूमि के पुरोहित संपन्न हैं, उन्हें इस योजना की जरूरत ही नहीं है। किसी भी धर्मगुरु के लिए आठ सौ रुपये महीने की पेंशन क्या मायने रखती है।
समाज कल्याण विभाग दावा कर रहा है कि योजना का प्रचार-प्रसार भी किया गया, लेकिन किसी धर्म के पुरोहित ने फार्म नहीं भरा है। प्रमुख सचिव एस. राजू का कहना है कि पुरोहित पेंशन योजना के संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। जिला प्रशासन तहसीलों में पुरोहिती का कार्य कर रहे पात्रों को योजना का लाभ लेने केलिए प्रेरित करेगा।