कुटी के करीब 50 तथा दान्तू, दुग्तू, बालिंग व नागलिंग नाम के गांवों के करीब 75 परिवारों को निगम ने अच्छे बेड, बिस्तर और क्राकरी आदि सामग्री देकर तथा उनके घरों की साफ.-सफाई , पुताई आदि कराने के साथ ही उनकी मार्केटिंग कर होम स्टे योजना से जोड़ा है।
निगम का लक्ष्य पिंडारी, सुंदरढूंगा, नामिक व पंचाचूली आदि सभी ट्रेकिंग रूटों के साथ ही दारमा घाटी के नाबी, सेला, चल, मिलम व सीपू में भी इस योजना का विस्तार कर करीब 250 गांवों को योजना से जोड़ने का है।
तिब्बत, चीन सीमा के इन गांवों में 70 से 80 फीसदी तक पलायन हो चुका है। कभी 400 से 500 परिवारों वाले गर्ब्यांग गांव में अब 70 से 80 परिवार ही बचे हैं। रोजगार के लिए के लिए यहां के लोगों ने शहरों का रुख किया। करीब इतने ही अन्य परिवार वर्ष में एकाध बार पूजा पाठ के लिएगांव आ पाते हैं। ऐसे में उनके घर वर्ष भर खाली पड़े रहते हैं। होम स्टे योजना से इन खाली पड़े घरों की भी देखभाल हो पाएगी। होम स्टे योजना में हर ग्रामीण को करीब 800 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से फायदा मिल जाता है।