प्रदेश में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के दावे और प्रयासों के बीच दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। चिंता की बात यह है कि हादसों की रोकथाम के लिए बनाई गई जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें ही लगातार कम हो रही हैं। नियमानुसार हर जिले में हर महीने बैठक होनी चाहिए, लेकिन राज्य में निर्धारित 156 बैठकों के मुकाबले इस वर्ष अगस्त तक केवल 54 बैठकें ही हुई हैं।
राज्य में 2021 से 2025 के बीच क्रमश: 1405, 1674, 1691, 1747 और 1846 सड़क हादसे हुए। यानी हर साल दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ी है। हादसों की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग, लोनिवि समेत अन्य विभागों के अधिकारियों की जिला सड़क सुरक्षा समिति गठित है।
नियमानुसार जिले में हर महीने एक बैठक होनी चाहिए। इसके अनुसार प्रदेश में सालाना 156 बैठकें होनी चाहिए थीं, लेकिन 2023 में 100, जबकि 2024 और 2025 में 84-84 बैठकें ही हुईं। इस वर्ष अगस्त तक 54 बैठकें हुई हैं। इस संबंध में संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव मेहरा ने बताया कि बैठकों को नियमित तौर पर कराए जाने के निर्देश आरटीओ व आरटीओ को दिए गए हैं।
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शाम को छह से रात नौ बजे तक अधिक हादसे
परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश में शाम छह से रात नौ बजे के बीच सबसे अधिक हादसे होते हैं। इसके बाद दोपहर तीन से शाम छह बजे का समय दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील है। महीने के लिहाज से जून में सबसे अधिक घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक भी प्रदेश पहुंचते हैं। दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मामले वाहन-वाहन टक्कर के हैं, जबकि दूसरे नंबर पर वाहन से पैदल यात्री के टकराने की घटनाएं हैं।