फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: मनमानी का अड्डा बन गया है आयुर्वेद विवि, साल 2017 से अब तक हुईं भर्तियों की होगी जांच

Tue, 03 Aug 2021 08:58 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

अपर सचिव राजेंद्र सिंह की ओर से कुलसचिव को भेजे गए आदेश में पिछले वर्षों में हुईं भर्तियों में की गई अनियमितता की जांच रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
जांच पड़ताल - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में हुईं भर्तियों की शासन ने जांच बैठा दी है। शासन ने कुलसचिव से बिंदुवार सभी भर्तियों पर रिपोर्ट तलब की है। अपर सचिव राजेंद्र सिंह की ओर से कुलसचिव को भेजे गए आदेश में पिछले वर्षों में हुईं भर्तियों में की गई अनियमितता की जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने विवि में पीआरडी के माध्यम से की जा रहीं भर्तियों और पिछले दो माह में पीआरडी से हुईं भर्तियों की रिपोर्ट भी मांगी है।

विज्ञापन


इसके अलावा नर्सिंग भर्ती, प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती, विवि द्वारा अपने स्तर से शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव को हटाते हुए नए कुलसचिव की नियुक्ति, लेखा अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी के पद प्रमोशन के पद एवं वित्त विभाग के पद विज्ञापन जारी करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

शासन ने योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि द्वारा विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि द्वारा गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। विवि में पिछले दो माह में 60 से अधिक युवाओं पीआरडी जवानों को भर्ती कर दिया गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

मनमानी का अड्डा बन गया है आयुर्वेद विवि

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय मनमानी का अड्डा बन गया है। शासन से जिस अधिकारी को कुलसचिव बनाकर भेजा जाता है, उसे विवि प्रशासन की ओर से खुद ही हटाकर नए कुलसचिव की नियुक्ति की जाती है। भर्तियों में न रोस्टर का कुछ अता-पता है और न ही शासन का कोई संज्ञान। आखिरकार अब जांच के निशाने पर अब कई अधिकारी आ गए हैं।

आयुर्वेद विवि में वर्ष 2017 से लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के बाद से भी यहां मनमानी का सिलसिला जारी है। शासन ने 2017 से अब तक की नियुक्तियों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। फिर चाहे प्रोफेसर की भर्ती हो या नर्सिंग स्टाफ की। हद तो तब है कि जो पद विवि में हैं ही नहीं, उन पदों पर प्रमोशन और एसीपी का भुगतान किया जा रहा है।

नियमानुसार भर्तियों के लिए शासन की अनुमति जरूरी होती है लेकिन विवि के अधिकारी किसी की अनुमति की जरूरत ही महसूस नहीं कर रहे हैं। हालात यह हैं कि खुद ही विज्ञप्ति जारी की जाती है और खुद ही उसे रद्द कर दिया जाता है। युवा भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

पीआरडी से भर्तियों की बरसात
आयुर्वेद विवि में ताजा मामला पीआरडी के माध्यम से होने वाली भर्तियों का है। यहां पिछले दो माह में ही बिना शासन की अनुमति, बिना नियमों का पालन किए 60 से अधिक नौजवानों को पीआरडी के माध्यम से भर्ती कर दिया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि विवि के अधिकारी किसी शह पर यह भर्तियां कर रहे हैं।

एक अधिकारी को बुलाया, कार्यमुक्त किया फिर रख लिया आयुर्वेद विवि में आयुष विभाग से एक अधिकारी को पहले बुलाया गया। फिर कार्यमुक्त किया गया और फिर वहीं रख लिया गया। इस पूरे प्रकरण में शासन को संज्ञान में ही नहीं लिया गया है। ऐसे तमाम प्रकरण हैं, जिसमें मनमानी खुलकर सामने आ रही है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें