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उत्तराखंड: हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा कैदी फंदे पर झूला, मौत

Sun, 09 Aug 2020 06:52 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सितारगंज (ऊधमसिंह नगर)

सार

  • 1994 में मेढ़ के विवाद में कर दी थी ग्रामीण की हत्या
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी ने अपने बैरक के टॉयलेट में फंदे पर झूलकर आत्महत्या कर ली। इससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। तहसीलदार और सीओ की मौजूदगी में अस्पताल में मृतक कैदी का पंचनामा भरा गया। कैदी की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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जेल अधीक्षक दधिराम मौर्या ने बताया कि नानकमत्ता उप तहसील के ग्राम देवकली ठेरा निवासी सूरत सिंह उर्फ सूरी (50) पुत्र शेर सिंह हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। पिछले साल मई में कैदी सूरी हरिद्वार की जेल से यहां शिफ्ट किया गया था। उन्होंने बताया कि कैदी ने सुबह करीब दस बजे बैरक में ही आत्महत्या कर ली। 

जेल अधीक्षक की सूचना के बाद एसडीएम विवेक प्रकाश के निर्देश पर तहसीलदार यूसुफ अली सीएचसी पहुंचे। यहां उनकी मौजूदगी में कोतवाली के एसआई धीरेंद्र सिंह परिहार ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए खटीमा भेजा।
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 कैदी की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। मृतक अपने पीछे पत्नी शीलो कौर, चार बेटी व दो बेटों कुलवंत सिंह और बलजीत सिंह को रोते विलखते छोड़ गया। इनमें दो बेटियों की शादी हो चुकी है। मृतक के बड़े भाई सिंगारा सिंह ने बताया कि वर्ष 1994 में गांव के ही महेंद्र सिंह से खेत की मेढ़ को लेकर विवाद हो गया था।

इसमें महेंद्र की मौत हो गई थी। बताया कि 2004 में नैनीताल सिविल कोर्ट में वे और उनका भाई मुख्त्यार सिंह बरी हो गए थे और सूरज सिंह उर्फ सूरी को उम्रकैद की सजा हो गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील करने पर सूरी को जमानत मिल गई थी। 2014 में कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट आने पर उसे हरिद्वार जेल ले जाया गया।

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एसडीएम और सीओ ने किया मुआयना

जेल से शव को अस्पताल लाने पर एसडीएम विवेक प्रकाश व सीओ सुरजीत कुमार ने अस्पताल में शव का मौका मुआयना किया। सीओ ने बताया कि कैदी के आत्महत्या करने की घटना की मजिस्ट्रीयल जांच भी होगी। 

लॉकडाउन लगने से अब तक नहीं मिला परिवार
कोरानाकाल में कैदियों से मुलाकात पर रोक के कारण परिवार के सदस्यों की मुलाकात ही नहीं हुई। मृतक कैदी के भाई मुख्त्यार सिंह ने बताया कि लॉकडाउन से पहले वह उससे मिलने गए थे। लेकिन मार्च में जैसे ही लॉकडाउन लगा तो परिवार से कोई संपर्क नहीं हो सका। 

मरने से पहले जेल के एक सिपाही से की थी बात
कैदी सूरज सिंह सूरी ने आत्महत्या करने से पहले जेल में डयूटी कर रहे सिपाही से भी बात की थी। बताया जा रहा है कि सिपाही ने उससे पूंछा था और उसने भी हंसकर अपनी कुशलता से बताई थी। मृतक हर दिन कैदियों की कमान के साथ जेल का काम करने जाता था। रविवार की वजह से आज वह कमान में नहीं गया था।
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