देहरादून के आरटीआई क्लब ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ऊर्जा निगम में तैनात अधिकारियों से एक माह का बिल मात्र 65 से 425 रुपये ले रही है, जबकि इनका बिल लाखों में आता है और इसका बोझ सीधे जनता पर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि तमाम अधिकारियों के घर बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं और जो लगे भी हैं, वह खराब स्थिति में हैं।
कॉरपोरेशन ने वर्तमान कर्मचारियों के अलावा रिटायर और उनके आश्रितों को भी बिजली मुफ्त में दी है। याचिका में कहा कि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश घोषित है और यहां हिमाचल से महंगी बिजली है, जबकि वहां बिजली का उत्पादन तक नहीं होता है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पिटकुल और यूपीसीएल के कार्मिकों को दी जा रही बिजली का संपूर्ण डाटा 25 नवंबर को पेश करने के आदेश सचिव ऊर्जा, पिटकुल और यूजेवीएनएल के अधिकारियों को दिए हैं।
कर्मचारी श्रेणी मासिक दर (रुपये में)
चतुर्थ श्रेणी 65
तृतीय श्रेणी 100
जेई व उसके समान 180
एई/ईई व उसके समान 250
डीजीएम व उसके समान 350
जीएम व उससे ऊपर 425
नोट: 2009 से लागू दरें अब तक रिवाइज नहीं हुई
सोर्स: आरटीआई क्लब का शिकायत पत्र
यूपीसीएल में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हैं, जिनका खामियाजा महंगी बिजली के रूप में आम उपभोक्ताओं को चुकाना पड़ता है। क्लब की ओर से याचिका में वित्तीय कुप्रबंधन और अनियमितता के मसले उठाए गए हैं। हम चाहते हैं कि उच्च न्यायालय की निगरानी में इनकी एक उच्चस्तरीय जांच हो।
- बीपी मैठाणी, अध्यक्ष, आरटीआई क्लब
यूपीसीएल की ओर से उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल कर दिया गया है। अफसरों और कर्मचारियों को दी जा रही बिजली सुविधा के बारे में सरकार और निगम के स्तर पर विचार चल रहा है। सभी पक्षों से बात करके इस पर निर्णय लिया जाएगा।
- बीसीके मिश्रा, प्रबंध निदेशक, यूपीसीएल