उत्तराखंड को नया राज्य बनाने के लिए कई वर्षों तक आंदोलन चलते रहे। कई वर्षों के आंदोलन के बाद 9 नवंबर 2000 को भारत के 27वें राज्य के रूप में नया राज्य बना। सन 2000 से 2006 तक यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था।
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जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। जिन मुश्किलों के बाद यह राज्य बना वो अभी तक चल रही हैं।
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उत्तराखंड की राजनीतिक उठापटक ने इस राज्य के विकास में हमेशा ही रोड़े बिछाए हैं। इस प्रदेश में बीते 14 साल में बीजेपी और कांग्रेस की सरकार रही है। इन दोनों पार्टियों ने समय-समय पर अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री बदलते रहे हैं।
बीजेपी ने शुरू की मुख्यमंत्री बदलने की परंपरा
राज्य बनने के बाद बीजेपी के नित्यानंद स्वामी मनोनीत मुख्यमंत्री बने। नवंबर 2007 में बीजेपी ने नित्यानंद स्वामी को मुख्यमंत्री बनाया। एक साल से कम समय में बीजेपी ने नित्यानंद की जगह भगत सिंह कोशियारी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया। पहले मुख्यमंत्री के रूप में नित्यानंद स्वामी का कार्यकाल 9 नबंबर 2000 से 29 अक्टूबर 2001 तक था।
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नित्यानंद स्वामी को बदलने के पीछे बीजेपी का मकसद राज्य में उनकी बिगड़ती छवि थी। बीजेपी का मानना था कि भगत सिंह कोशियारी को मुख्यमंत्री बनाकर वो आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर लेंगे। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और कांग्रेस ने 2002 के चुनावों में बीजेपी को माद दे दी।
नारायण दत्त तिवारी ने पूरा किया कार्यकाल
अभी तक प्रदेश में केवल कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी ने बतौर सीएम पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है। एनडी तिवारी 2 मार्च 2002 को प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 7 मार्च 2007 तक इस प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
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इस दौरान बीजेपी प्रदेश में विकास के नारे के साथ खेलती रही। हालांकि बीजेपी ने एनडी तिवारी के शासनकाल में अपनी छवि प्रदेश में सुधार ली और अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने में कामयाब हुई।
बीजेपी ने दूसरे कार्यकाल में बदले तीन मुख्यमंत्री
2007 के चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी ने बीसी खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि पार्टी की अंदरूनी राजनीति के कारण खंडूरी को दो साल में ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। खंडूरी ने 8 मार्च 2007 से 23 जून 2009 तक बतौर सीएम काम किया।
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खंडूरी के बाद बीजेपी ने रमेश पोखरियाल निशंक को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि मुख्यमंत्री के रूप में रमेश पोखरियाल का कार्यकाल केवल 808 दिन ही चला। निशंक पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद निशंक को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
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इसके बाद एक बार फिर प्रदेश की कमान बीसी खंडूरी के हाथों में आ गई। बीजेपी के इस कदम के बाद राज्य में उसकी छवि बिगड़ गई। जिसका खामियाजा उसे अगले चुनाव में मिला। 2012 में हुए चुनावों में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और एक बार फिर कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब हो गई।
उत्तराखंड में अब तक मुख्यमंत्री और उनका कार्यकाल
(बीजेपी)
नित्यानंद स्वामी - 9 नबंबर 2000 - 29 अक्टूबर 2001 - बीजेपी - 354 दिन
भगत सिंह कोशियारी - 30 अक्टूबर 2001 - 1 मार्च 2002 - बीजेपी - 123 दिन
(कांग्रेस)
एनडी तिवारी - 2 मार्च 2002 - 7 मार्च 2007 - कांग्रेस - 1832 दिन
(बीजेपी)
बीसी खंडूरी - 8 मार्च 2007 - 23 जून 2009 - बीजेपी - 839 दिन
रमेश पोखरियाल निशंक - 24 जून 2009 - 10 सितंबर 2011 - बीजेपी - 808 दिन
बीसी खंडूरी - 11 सितंबर 2011 - 13 मार्च 2012 - बीजेपी - 185 कुल 1024 दिन
(कांग्रेस)
विजय बहुगुणा - 13 मार्च 2012 - अब तक