दोनों शूटरों को सुरेंद्र सिंह नेगी उर्फ सूरी ने अपने भांजे अमित नेगी और बागपत निवासी अमित मखियाली के माध्यम से मोटरसाइकिल और पिस्टल उपलब्ध कराई। हत्याकांड से पूर्व वर्ष 2017 में ही हत्या को अंजाम देने के लिए शूटर कोटद्वार आए थे, लेकिन तब वकील सुशील रघुवंशी कोटद्वार से बाहर गए हुए थे।
एसएसपी ने बताया कि दोनों शूटरों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और मोटरसाइकिल की बरामदगी के लिए वर्तमान में अल्मोड़ा जेल में बंद हत्याकांड के मास्टर माइंड रूपेश त्यागी को पुलिस रिमांड में लेने की तैयारी की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि रूपेश त्यागी पूर्व में देहरादून में एक वकील की हत्या के मामले में संलिप्त रहा है। दोनों शूटर चिह्नित कर लिए गए हैं।
इस हत्याकांड की साजिश में शामिल दो शूटर समेत अन्य आठ लोगों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने सघन छानबीन के बाद इस मामले में नामजद किए गए अमर सिंह, नवीन सिंह और बृजेश बेबनी को क्लीन चिट दे दी है। मामले का खुलासा करने में एसआईटी टीम में शामिल दून के एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल, सीओ पौड़ी अनिल जोशी, कोटद्वार के कोतवाल मनोज रतूड़ी की मुख्य भूमिका रही।
13 सितंबर, 2017 को बीईएल रोड पर अपने घर के बाहर हुई वकील सुशील रघुवंशी की हत्या के बाद कई दिनों तक कोटद्वार में आंदोलन चलता रहा। बार एसोसिएशन के बैनर तले कई दिन तक वकील न्यायिक कार्यों से विरत रहकर आंदोलन चलाते रहे।
करीब एक सप्ताह तक कोटद्वार में वकीलों ने कभी कोतवाली का घेराव तो कभी नेशनल हाईवे जाम कर हत्याकांड के खुलासे की मांग की, लेकिन पूरे एक साल और आठ महीने बाद चौतरफा पड़ते दबाव और हाईकोर्ट की फटकार के बाद एसआईटी ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए नामजदों में से दो और एक अन्य को गिरफ्तार कर लिया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन सिंह पंवार, अधिवक्ता जसवीर सिंह राणा व ध्यान सिंह नेगी ने बताया कि वकील की हत्या के बाद केवल वकील ही नहीं, हर वर्ग और इलाके में आक्रोश बना रहा।
बार एसोसिएशन को राज्य भर के बार संघों का समर्थन मिला। बार एसोसिएशन ने उनके आंदोलन को समर्थन देने वाले दूसरे संगठनों का आभार जताया। उत्तराखंड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी और आरटीआई कार्यकर्ता आशीष किमोठी का कहना है कि मृतक की पत्नी रेखा रघुवंशी ने सड़क से लेकर कोर्ट तक अपने पति की हत्या की जांच करवाने के लिए लड़ाई लड़ी। पुलिस और कई जांच एजेसियां जब मामले को नहीं खोल पा रही थीं तो हाईकोर्ट से इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की गुहार लगाई जा रही थी।