अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी
मेरठ यूपी के सत्यदेव त्यागी की ओर से याचिका दायर की गई है। कोर्ट में आरक्षित मूल की महिला अभ्यर्थियों की हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र पर सुनवाई भी हुई। इन महिलाओं का कहना था कि वह आरक्षण की हकदार हैं और आरक्षण संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता को आपत्ति दाखिल करने को समय दिया है। अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।
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कोर्ट ने पूर्व के आदेशों के अनुपालन के लिए भी कहा
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने उत्तराखंड पीसीएस के लिए 22 सितंबर को संशोधित कट-ऑफ अंक सूची प्रकाशित की। इस सूची में उत्तराखंड महिला आरक्षण को शामिल किया गया। इसे याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 16, 341 के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने 30 सितंबर को 22 सितंबर को जारी संशोधित कट-ऑफ अंक सूची पर रोक लगा दी थी और आयोग को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। आज हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने 22 सितंबर की कट-ऑफ अंक सूची में संशोधन करने के लिए न्यायालय से अनुमति मांगी, जिससे सूची को महिला आरक्षण के बिना इसे फिर से जारी की जा सके। कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेशों का अनुपालन करने को भी कहा है।
उत्तराखंड महिला आरक्षण के बिना संशोधित कट-ऑफ अंक सूची जारी होगी
याचिकाकर्ता सत्य देव त्यागी के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने बताया कि कोर्ट ने आयोग को 24 जून 2006 के सरकारी आदेश (उत्तराखंड मूल की महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने) पर रोक लगाने के अपने पहले के आदेशों का विधिवत पालन करने के लिए कहा है। आयोग ने कहा कि आरक्षित श्रेणी के पदों के लिए भी उत्तराखंड महिला आरक्षण के बिना संशोधित कट-ऑफ अंक सूची जारी की जाएगी।