अपना कूड़ा अपनी जेब में
वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन कर पूरे देश में अधिनियम में ईपीआर (विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व) को लागू किया था। आसान शब्दों में कहें तो यह नियम अपना कूड़ा अपनी जेब में रखने के लिए प्रेरित करता है। मतलब जो कोई कंपनी किसी भी स्तर पर प्लास्टिक कूड़े को जनरेट करेगी, उसे इसके निपटारे की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसमें कंपनियों को यह भी छूट दी गई थी कि वह अपना कूड़ा खुद उठाएं या भुगतान कर दूसरी एजेंसियों की सेवाएं लें।
एसडीसी ने तैयार किया है 99 पेज का दस्तावेज
उत्तराखंड में चल रहे ईपीआर संकट को देखते हुए एसडीसी संस्था ने इसके हितधारकों के लिए 99 पेज का एक दस्तावेज तैयार किया है। इसमें अभी तक किए गए सभी संशोधनों को विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया है। संस्था के अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने बताया कि हमने इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की साइट से संशोधन की प्रतियों को उठाया गया है, जो ईपीआर के मामले में उत्तराखंड में सभी उत्पादकों, आयातकों, ब्रांड मालिकों और प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसर के लिए अधिक जागरूकता और समझ पैदा करने में सहायता प्रदान करेगा।