आयोग के इस पत्र से बढ़ा असमंजस
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस मामले में एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें बताया गया था कि पंचायती राज अधिनियम की धारा 9(13) के अनुसार, ऐसा व्यक्ति जिसका नाम ग्राम पंचायत के किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल हो, उस ग्राम पंचायत में वोट देने और किसी भी पद पर चुनाव लड़ने, नामांकन करने, नियुक्ति का पात्र होगा।
इसी प्रकार, प्रावधान क्षेत्र पंचायत के लिए धारा 54(3) और जिला पंचायत के लिए धारा 91(3) में दिए गए हैं। इस सर्कुलर के जारी होने के बाद असमंजस बढ़ गया। आयोग का स्पष्ट रुख था कि जो मतदाता सूची में शामिल हो चुका, वह मतदान व चुनाव लड़ने का अधिकारी है जबकि नाम गलत तरीके से शामिल कराने वालों को लेकर आयोग ने कोई स्पष्ट रुख नहीं दिखाया। लिहाजा, हाईकोर्ट ने आयोग के इस सर्कुलर पर रोक लगा दी है।
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अब सर्कुलर पर तो रोक लगी लेकिन आगे क्या होगा?
सवाल ये भी है कि हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। केवल चुनाव लड़ने संबंधी सर्कुलर पर रोक लगाई है। लिहाजा, जो लोग नामांकन कर चुके हैं, उनका क्या होगा। निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के हिसाब से नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच के बाद नाम वापसी की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। ऐसे में अधिसूचना में संशोधन न किया गया तो दो जगह नाम शामिल वाले प्रत्याशियों का क्या होगा? आयोग सचिव राहुल गोयल का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद ही इस पर स्पष्ट बात की जा सकेगी।