अब तक विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूजीएफआई) की अगुवाई कर रहे उत्तराखंड को करारा झटका लगा है। डब्ल्यूजीएफआई की कमेटी से उत्तराखंड बाहर हो गया है।
औली में विश्वस्तरीय आइस स्लोप और देहरादून में आइस रिंक के बूते उत्तराखंड हमेशा विंटर गेम्स कराने के लिए तैयार रहता है। डब्ल्यूजीएफआई के अध्यक्ष पद पर भी करीब आठ साल से उत्तराखंड का ही दबदबा रहा है। लेकिन इस बार फेडरेशन में उत्तराखंड को जगह नहीं मिल सकी।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अध्यक्ष पद पर फिर दावेदारी कर रहे उत्तराखंड के दावेदार सुरेंद्र सिंह पटवाल को सिर्फ चार वोट मिले।
सूत्रों की मानें तो स्टेट विंटर गेम्स फेडरेशन पदाधिकारियों की जिद इसके पीछे बड़ी वजह रही। दरअसल, पटवाल की उम्र 68 वर्ष हो चुकी है। ऐसे में एनुअल जनरल बॉडी मीटिंग (एजीएम) में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य किसी नए सदस्य को अध्यक्ष की बागडोर सौंपना चाहते थे। लेकिन, स्टेट फेडरेशन अड़ी रही तो चुनाव कराया गया।
अन्य पदों से भी धोया हाथ
उत्तराखंड अध्यक्ष पद पर तो हारा ही, कार्यकारिणी के बाकी पदों में भी अब उसका प्रतिनिधित्व नहीं बचा है। दरअसल, फेडरेशन के नियमों के अनुसार एक राज्य कार्यकारिणी के एक ही पद पर चुनाव लड़ सकता है। स्टेट फेडरेशन की जिद के चलते पटवाल को फिर अध्यक्ष पद पर लड़ाया गया। इससे बाकी पदों पर प्रदेश का कोई प्रत्याशी दावेदारी नहीं कर सका।
पांगती पर भी सवाल
राज्य एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस पांगती की उम्र 70 साल से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद वह पद पर बने हुए हैं। जबकि नियमों के अनुसार कोई पदाधिकारी सिर्फ 70 साल की उम्र तक ही एसोसिएशन की बागडोर संभाल सकता है।
स्टेट फेडरेशन में 25 नए सदस्य
उत्तराखंड विंटर गेम्स फेडरेशन के सचिव गोविंद पंत ने बताया कि राज्य में एसोसिएशन को मजबूत करने के लिए 25 नए सदस्य जोड़े गए हैं। इनमें अधिकतर जोशीमठ के हैं। राज्य के अन्य जिलों के सदस्यों को भी कार्यकारिणी में रखा गया है। बताया कि प्रदीप रावत मेमोरियल ओपन स्कीइंग चैंपियनशिप में भी राज्य एसोसिएशन सहयोग करेगी।
आयु का कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन चुनाव में हमारे ही कुछ लोगों ने साथ नहीं दिया। गढ़वाल मंडल विकास निगम ने हमारे विपक्ष में वोट दिया, जिस कारण हमारी हार हुई।
-गोविंद पंत, सचिव, उत्तराखंड विंटर गेम्स फेडरेशन