इस घोटाले में दो आईएएस और पांच पीसीएस अफसर निलंबित किए गए। 30 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी, दलाल और किसानों को जेल जाना पड़ा था। घोटाले के आरोप में तत्कालीन एसएलओ और पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह को मुख्य आरोपी बनाया था।
सिंह भी करीब 14 महीने तक जेल में रहे थे। एसआईटी की जांच में यह घोटाला 400 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का पाया गया। वर्ष 2019 में एसआईटी ने आरोपपत्र भी दाखिल किया और दिनेश प्रताप समेत कई अधिकारियों और किसानों के खिलाफ आरोप भी तय हुए। इस बीच घोटाले की जांच के बाद ईडी भी सक्रिय हुई। ईडी ने अपनी जांच के दौरान अधिकारियों और किसानों की करोड़ों रुपयों की संपत्ति को संबद्ध किया।
ईडी गत तीन सालों से इस मामले की जांच कर रही थी। अब जांच पूरी होने के बाद ईडी ने स्पेशल ईडी कोर्ट में पीसीएस दिनेश प्रताप सिंह, किसान जिशान अहमद, सुधीर चावला, अजमेर सिंह, गुरवैल सिंह, सुखवंत सिंह, सुखदेव सिंह और सतनाम सिंह के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इस चार्जशीट पर संज्ञान के लिए कोर्ट ने 13 सितंबर की तिथि नियत की है।