उत्तराखंड भवन सन्निर्माण एवं कर्मकार कल्याण बोर्ड एक बार फिर राजनीति के भेंट चढ़ता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल से शुरू हुए विवाद अब नए सिरे से परवान चढ़ रहे हैं। कहीं न कहीं इससे श्रमिकों के हितों का नुकसान हो रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल से कर्मकार बोर्ड के विवादों की शुरुआत हुई थी। पहले सचिव पद से दमयंती रावत को हटाया गया। इसके बाद अध्यक्ष पद से श्रम मंत्री हरक सिंह रावत हटाकर शमशेर सिंह सत्याल की अगुवाई में बोर्ड का गठन किया गया। इसके बाद सरकार के निर्देशों पर बोर्ड का विशेष ऑडिट शुरू किया गया। इस बीच मुख्यमंत्री बदल गए। यहां से विवादों का दूसरा चरण शुरू हुआ। सीएम बदलने के बाद सबसे पहले सचिव पद से दीप्ति सिंह को हटाकर सरकार ने मधु नेगी चौहान को जिम्मेदारी सौंपी।
इसके बाद अध्यक्ष और सचिव के बीच तनातनी शुरू हो गई। अध्यक्ष लगातार राशन बांटने पर जोर देते रहे, लेकिन सचिव नियमावली पर अड़ी रहीं। सचिव मधु नेगी का कहना है कि नियमों के हिसाब से इसका प्रस्ताव शासन से पास होने के बाद ही राशन वितरण किया जा सकता है लेकिन शासन ने अनुमति नहीं दी है। कलह इतनी बढ़ती चली गई कि एक बार फिर बोर्ड का दफ्तर राजनीति का अखाड़ा बन गया है।
अध्यक्ष और सचिव विवादों के बीच अब मामला अध्यक्ष सत्याल और श्रम मंत्री हरक सिंह रावत के बीच हो गया है। मंत्री जहां उनके कार्यकाल की जांच की बात कर रहे हैं तो अध्यक्ष मंत्री पर ही सवाल उठा रहे हैं। मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि सरकार पहले से ही राशन वितरण कर रही है, सरकार श्रमिकों को आर्थिक मदद पहुंचाने पर विचार कर रही है। जबकि अध्यक्ष सत्याल का कहना है कि बोर्ड से फैसला होने के बाद भी सचिव किसी और के इशारे पर राशन बांटने का काम शुरू नहीं कर रही हैं।
कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष ने मंत्री, सचिव पर उठाए कई सवाल
कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने बुधवार को बैठक के दौरान न केवल सचिव बल्कि श्रम मंत्री हरक सिंह रावत पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बोर्ड के पूर्व के तमाम कार्यों में भारी लापरवाही बरती गई लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
यह उठाए सवाल
-कल्याण बोर्ड का कार्यालय भवन हल्द्वानी से देहरादून स्थानान्तरित किया गया। क्या इस संबंध में शासन स्तर से आदेश निर्गत किए गए।
-पूर्व में दमयंती रावत को बिना शासकीय/विभागीय (उनके मूल विभाग) एनओसी के पहले बोर्ड के कार्यवाहक सचिव तथा बाद में सचिव कल्याण बोर्ड नामित किया गया, जिसकी अनुमति शासन स्तर से बाद में ली गई तो रावत को किसकी अनुमति से नामित किया गया।
-बोर्ड का दफ्तर नेहरू कालोनी भवन में बिना किसी टेंडर शुरू किया गया। शासन से एक फ्लोर की अनुमति ली गई और दो फ्लोर का किराया दिया गया। क्या भवन मालिक से इसकी रिकवरी की जाएगी।
-गत वर्ष अकेले मंत्री हरक सिंह रावत और सचिव दमयंती रावत ने 350 लाख से अधिक के राशन-किट की खरीद की, जिसका भुगतान हो गया है। इस संबंध में शासन से अनुमति प्रस्तुत की जाए।
-कल्याण बोर्ड के संपादन हेतु उपनल के माध्यम से नियोजित कर्मचारी शासन के आदेश के अनुसार रखे गए हैं, जिसे ऑडिट टीम ने स्वयं सही बताया (17 की सीमा) वर्तमान में उससे कम कर्मचारी नियोजित है। मंत्री ने 38 कर्मचारी रखे थे। कोटद्वार में बिना शासन की अनुमति ही कैंप ऑफिस बनाया गया था।
-बोर्ड का विभागीय वाहन मंत्री द्वारा प्रयोग किया जा रहा है। उसका ईंधन का खर्च बोर्ड देता है। सचिव कल्याण बोर्ड बताएं ऐसा भुगतान करने का क्या कारण है।
-चिकित्सालय निर्माण हेतु (ईएसआई) बोर्ड द्वारा एक कम्पनी को 20 करोड़ का भुगतान किया गया। अगर कंपनी को धन का भुगतान किया जाना सही था तो फिर 20 करोड कंपनी को वापिस क्यों किया गया? उसकी उच्च स्तरीय जांच सार्वजनिक करें।
-ऑडिट में पूर्व अध्यक्ष एवं श्रम मंत्री हरक सिंह रावत के कार्यकाल की गंभीर वित्तीय अनियमित्ताएं सामने आई थीं। इन पर जवाब सचिव को देना है लेकिन अब तक जवाब क्यों नहीं दिया गया।