तारिणी न सिर्फ अच्छी हिंदी बोलती हैं, बल्कि संस्कृत के कई श्लोकों का बखूबी उच्चारण भी कर लेती हैं। तारिणी दो साल पहले ऋषिकेश घूमने आईं थीं, लेकिन बाद में यहीं की होकर रह गईं।
पिता अंतोनियो डेगनिनो ने बनारस विश्वविद्यालय में प्राप्त की है शिक्षा
तारिणी बताती हैं कि वर्ष 1960 में उनके पिता अंतोनियो डेगनिनो ने बनारस विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की। भारत से उनके पिता को बहुत लगाव था, यही कारण है कि उनके पिता ने उनका भारतीय नाम तारिणी रखा। पासपोर्ट में भी उनका यही नाम है।
वेनेजुएला में भी वह समाजसेवा ही करतीं हैं। आध्यात्मिक जीवन के प्रति रुझान उन्हें भारत की ओर खींच लाया। उन्होंने केरल के आश्रम में लंबा समय बिताया। उसके बाद ऋषिकेश चली आईं। अब वह यहां गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।