अभी तक ज्यादातर परीक्षाओं में बायोमीट्रिक हाजिरी का प्रावधान है। इसमें तमाम ऐसे भी मामले देशभर में सामने आ चुके हैं, जब अंगूठे के निशान का गलत इस्तेमाल करके नकल पकड़ी गई है। लेकिन आंखों की पुतली से पहचान की प्रक्रिया अभी तक की सबसे मजबूत है। वैज्ञानिक तौर पर यह स्पष्ट है कि एक आंख की पुतली किसी अन्य व्यक्ति की आंख की पुतली जैसी नहीं हो सकती। न ही पुतली का डुप्लीकेट बनाया जा सकता है।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भी कर रहा तैयारी
आईरिस और फेस रिकग्नीशन के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भी तैयारी कर रहा है। अभी तक यहां होने वाली समूह-ग की परीक्षाओं में बायोमीट्रिक का इस्तेमाल किया जाता रहा है। आने वाले समय में आयोग भी इस पर फैसला ले सकता है। इसके बाद सभी समूह-ग की परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को भी इन दोनों पहचान से गुजरना होगा।