अब मशरूम पहाड़ की सेहत भी सुधारेगी और आर्थिकी भी मजबूत करेगी। उत्तराखंड विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी परिषद(यूकॉस्ट) ने विज्ञान धाम में मशरूम की गैनोडर्मा प्रजाति विकसित की है। इस प्रजाति का प्रशिक्षण अब पहाड़ के युवाओं को देने का सिलसिला शुरू किया जाएगा।
यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने बताया कि गैनोडर्मा मशरूम रोग प्रतिरोधक गुणों से भरपूर है। यह हृदय रोग, हैपेटाइटिस, अर्थराइटस, थकान, रक्तचाप और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने सहित कई रोगों के उपचार में सहायक होता है।
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पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यूकॉस्ट ने हिमाचल प्रदेश से इसके बीज मंगाकर इसे यहां विकसित कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस मशरूम को पहाड़ में और बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता है क्योंकि वहां का पर्यावरण इसके अनुकूल है।
लिहाजा, यूकॉस्ट का मकसद है कि पहाड़ में ज्यादा से ज्यादा लोग इस मशरूम के उत्पादन को प्रोत्साहित हों। बाजार में इसकी कीमत पांच हजार से 20 हजार रुपये प्रति किलो तक होती है। ऐसे में लोगों को आर्थिक तौर पर यह मशरूम उत्पादन बड़ा सहारा देगी। वहीं, इसके सेवन से उनकी सेहत भी सुधरेगी।
लाखों की आमदनी कर सकते हैं किसान
80 वर्ग मीटर भूमि पर उगने वाला गैनोडर्मा मशरूम करीब तीन लाख 20 हजार रुपये प्रतिवर्ष की आय दे सकता है। प्रदेश में किसान बड़े पैमाने में गैनोडर्मा मशरूम की खेती करके लाखों की आमदनी कमा सकता है।
यूकॉस्ट उपलब्ध कराएगा बाजार
यूकॉस्ट ने मशरूम का उत्पादन करने के बाद अब ग्रामीण इलाकों तक इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। पहले बैच को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यूकॉस्ट महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल के मुताबिक, वह इसके लिए किसानों को बाजार भी उपलब्ध कराएंगे।