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उत्तराखंड: नगालैंड में टिहरी का जवान गौतम शहीद, देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लाया गया पार्थिव शरीर

Mon, 06 Dec 2021 08:26 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

नगालैंड में सुरक्षा बलों की फायरिंग की दो घटनाओं में 13 कोयला खान मजदूरों की मौत हो गई जबकि 11 घायल हो गए हैं।
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शहीद गौतम लाल का पार्थिव शरीर पहुंचा जौलीग्रांट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नगालैंड के मोन जिले में शनिवार को सैन्य बलों की फायरिंग में 13 लोगों की मौत के बाद रविवार को भी तनाव चरम पर रहा। जानकारी के मुताबिक इस घटना के बाद हुई हिंसा में टिहरी जिले के नौली गांव (हिंसरियाखाल पट्टी) निवासी सेना के पैराटू्रपर गौतम लाल (24) शहीद हो गए। शहीद का पार्थिव शरीर सोमवार शाम को जौलीग्रांट देहरादून लाया गया। यहां विधायक विनोद कंडारी शहीद गौतम को श्रदांजलि दी। आज पार्थिव शरीर एम्स ऋषिकेश में रहेगा और मंगलवार को पैतृक गांव पहुंचाया जाएगा। जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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वहीं गौतम के शहीद होने की खबर से क्षेत्र में शोक है। रमेश लाल और रूपा देवी के सबसे छोटे पुुत्र गौतम वर्ष 2018 में पैराशूट रेजीमेंट की 21वीं बटालियन में भर्ती हुए थे। इन दिनों वह नगालैंड ड्यूटी पर थे। राजकीय इंटर कॉलेज हिंसरियाखाल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद वह सेना में भर्ती हो गए थे। 

अक्तूबर में आए थे घर 

गौतम अविवाहित थे। वह अक्तूबर मेें एक माह की छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे। गौतम लगभग हर दो दिन के अंतराल में घर में फोन करके माता-पिता व परिजनों का हाल जानते थे। शुक्रवार को भी उनका फोन आया था। उन्होंने जनवरी में घर आने की बात की थी।  

राज्यपाल ने जताया शोक 

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने ओटिंग, नगालैंड में शहीद हुए पैराशूट रेजीमेंट की 21वीं बटालियन के पैरा कमांडो गौतम लाल (ग्राम नौलि, टिहरी गढ़वाल) की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राज्यपाल ने दिवगंत आत्मा की शांति एवं परिजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की है। 

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ये थी घटना

नगालैंड में सुरक्षा बलों की फायरिंग की दो घटनाओं में 13 कोयला खान मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 11 घायल हो गए हैं। पुलिस ने बताया कि फायरिंग की पहली घटना शनिवार की शाम गलत पहचान के कारण हुई, जिसमें मजदूरों को युंग ऑन्ग गुट के उग्रवादी समझकर सैनिकों ने गोलियां चला दी। इस घटना में छह मजदूरों की मौत हुई।

जब ये सभी मजदूर घर नहीं लौटे तो स्थानीय युवा और गांव वाले उनकी तलाश में निकले और सेना की गाड़ियों को घेर लिया। इसके बाद हुई हिंसा में एक जवान की मौत हो गई और सेना की गाड़ियों को आग लगा दी गई। भीड़ से बचने के लिए सैनिकों ने फिर गोली चलाई, जिसमें 7 और स्थानीय लोगों की मौत हो गई। घायलों में दो की हालत गंभीर है, जिन्हें इलाज के लिए गुवाहाटी भेजा गया है। 

असम राइफल्स के कैंप को तहस-नहस किया
घटना को लेकर रविवार को भी स्थानीय स्तर पर तनाव बना रहा और गुस्साई भीड़ ने कोनयाक यूनियन और असम राइफल के कैंप को तहस-नहस कर दिया। अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने मोन जिले में मोबाइल, इंटरनेट, डाटा सेवा, बल्क एसएमएस पर रोक लगा दी है। पुलिस सेना द्वारा किए गए गलत पहचान के दावे की जांच कर रही है। सेना ने भी घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित कर दी है और घटना पर गहरा दुख प्रकट किया है। 
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