ताऊ गैंग के सरगना इंद्रपाल चौधरी के जेल जाने के बाद सतीश ही मुखिया बन गया था। सतीश चौधरी का नाम गैंग के गिने चुने लोग ही जानते थे। ऐसे में यदि कोई पकड़ा भी जाता था तो उसका नाम यदा कदा ही पुलिस को पता लग पाता था।
उस पर हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 11 मुकदमे दर्ज हैं। मगर, वह किसी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया। इस बार उत्तराखंड पुलिस के हरिद्वार, एसटीएफ और रेंज स्तर पर गठित की गई टीमों ने सतीश को दबोच लिया।
टिंटेड ग्लास उतार दिया होता तो न होती घटना
पूछताछ में सतीश ने बताया कि उसने डेढ़ साल पहले तारा मोरा और एक अन्य ज्वेलर की दुकान की रेकी की थी। उस वक्त दोनों दुकानों के बाहरी शीशे पर काली फिल्म (टिंटेड ग्लास) चढ़ी हुई थी। वह ऐसी दुकानों को इसलिए चुनता है क्योंकि इनमें बाहर से अंदर कोई नहीं देख सकता। इस दरम्यान दूसरे ज्वेलर ने तो अपनी दुकान से टिंटेड ग्लास उतरवा दिए। मगर, तारा मोरा के यहां अब भी वही ग्लास (शीशे) थे। ऐसे में योजना काम कर गई। यदि तारा मोरा भी दूसरे दुकानदार की तरह टिंटेड शीशे उतरवा देते तो उनके यहां घटना होने न होती।
48 घंटों में पुलिस की टीमों ने इस बड़ी घटना का खुलासा किया है। अब तक इसमें रिकवरी भी लगभग पूरी की जा चुकी है। हरिद्वार पुलिस के साथ-साथ एसटीएफ भी अन्य पहलुओं पर इसकी पड़ताल कर रही है। साथ ही जहां तक लूटे गए माल की बरामदी के प्रयास किए जा रहे हैं।
-आईजी अमित सिन्हा, प्रवक्ता, उत्तराखंड पुलिस