शासन ने प्रदेश में बनाए जाने वाले नए पुलों के निर्माण के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट(डीपीआर) और टेंडर प्रक्रिया की नई गाइडलाइन तैयार की है। नए मानकों के तहत विभाग सूचीबद्ध कंसल्टेंटों से पुलों की जो डीपीआर तैयार कराएगा, उसके अब अलग-अलग चरण होंगे। हर चरण में डीपीआर की जांच होगी। विभाग का दावा है कि नई गाइडलाइन के लागू होने से पुलों की डीपीआर की गुणवत्ता में सुधार होगा और उनमें एकरूपता रहेगी।
अभी तक विभाग में पुलों की डीपीआर सप्लाई आर्डर या वर्क आर्डर के माध्यम से बनाई जाती थी। डीपीआर को बनाने के लिए अनुबंध की कोई शर्त नहीं थी। सभी कंसल्टेंट सीधे ही विभाग को फाइनल डीपीआर उपलब्ध कराते थे। ऐसे में गठित डीपीआर की गुणवत्ता पूर्ण रूप से सुनिश्चित नहीं हो पा रही थी। डीपीआर में संशोधन की भी गुंजाइश नहीं होती थी।
अब शासन ने पुलों के कार्यों के डिजाइन व डीपीआर कंसलेंट के माध्यम गठित कराए जाने के लिए एक मानक रिक्वेस्ट फॉर कोटेशन प्रपत्र जारी किया है। इस मानक के तहत अब अनुबंधन की शर्तें, टर्मस ऑफ रेफरेन्स, भुगतान का शेड्यलू का स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अब विभागीय इंजीनियर को कंसलटेंट चयन करने के लिए यह पूरी प्रक्रिया प्रयोग में लानी होगी।
डीपीआर तैयार करने के ये होंगे चरण
पुलों की डीपीआर तैयार करने के लिए इनसेप्शन रिपोर्ट, प्रिलिमिनरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट, ड्राफ्ट डीपीआर एवं फाइनल डीपीआर विभाग को प्रस्तुत करनी होगी। प्रत्येक चरण में इनकी गुणवत्ता की जांच होगी।
पुलों की डीपीआर और डिजाइन के लिए तैयार नई गाइडलाइन से गुणवत्ता व समयबद्धता में सुधार आएगा। पुलों की डीपीआर बनाए जाने में एकरूपता भी रहेगी।
-ललित मोहन, तकनीकी सलाहकार, लोनिवि