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एक्सक्लूसिव : गुजरात में मिले 5.5 करोड़ साल पुराने प्राणी का रहस्य जानने में जुटे गढ़वाल के वैज्ञानिक

Fri, 25 Dec 2020 04:57 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal संदीप थपलियाल, अमर उजाला, श्रीनगर
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गढ़वाल विश्वविद्यालय - फोटो : file photo
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वैज्ञानिक गुजरात में मिले साढ़े 5 करोड़ साल पुराने अज्ञात प्राणी के जीवाश्म की गुत्थी नहीं सुलझा पाए। इसलिए इस आदिम प्राणी का नाम पहेलियां मिस्टीरियस रख दिया गया है।

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वैज्ञानिक अभी तक यह खोज पाए हैं कि यह अज्ञात प्राणी स्तनधारी था। एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के भूविज्ञानी इस रहस्यमय जानवर की पहचान में जुटे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि खुदान में और जीवाश्म मिलेंगे, तभी इस आदिम प्राणी के रहस्य से पर्दा हट पाएगा।

वर्ष 2016 में गढ़वाल विवि के भूविज्ञानी प्रो. राजेंद्र एस राणा गुजरात के ताड़केश्वर खान में जीवाश्मों की खोज कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक जानवर के दो दांत और लगभग 4 सेंटीमीटर लंबा निचला जबड़ा मिला। इस प्राणी के दांतों की बनावट अन्य प्राणियों से बिल्कुल अलग थी। जो किसी भी प्राणी से नहीं मिल रही थी।

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रहस्य बरकरार

प्रो. राणा बताते हैं कि यह जीवाश्म लगभग साढ़े 5 करोड़ साल पुराने हैं। दांतों की मॉरफोलॉजी (आकारिकी) से यह स्पष्ट हो गया है कि यह आदिम प्राणी स्तनधारी था। लेकिन गण एवं कुल का पता नहीं चल पाया।

इसके बाद जगह-जगह जीवाश्मों पर किए गए शोधों का अध्ययन किया गया। लेकिन इस अज्ञात प्राणी के बारे में जानकारी हासिल नहीं हो सकी।

उन्होंने बताया कि इस आदिम प्राणी का नामकरण पहेलियां मिस्टिरियस किया गया है। यानि कि जो पहले सुलझ नहीं पाई है और रहस्य बरकरार है।

प्रो. राणा कहते हैं कि यदि ताड़केश्वर खान में और जीवाश्म मिलते हैं, तो यह पता चल सकेगा कि यह अज्ञात प्राणी दिखता कैसा था और किसी प्राणी का आदिम रिश्तेदार था। इससे क्रमानुगत विकास को भी समझने में आसानी होगी।
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