प्रो. राणा बताते हैं कि यह जीवाश्म लगभग साढ़े 5 करोड़ साल पुराने हैं। दांतों की मॉरफोलॉजी (आकारिकी) से यह स्पष्ट हो गया है कि यह आदिम प्राणी स्तनधारी था। लेकिन गण एवं कुल का पता नहीं चल पाया।
इसके बाद जगह-जगह जीवाश्मों पर किए गए शोधों का अध्ययन किया गया। लेकिन इस अज्ञात प्राणी के बारे में जानकारी हासिल नहीं हो सकी।
उन्होंने बताया कि इस आदिम प्राणी का नामकरण पहेलियां मिस्टिरियस किया गया है। यानि कि जो पहले सुलझ नहीं पाई है और रहस्य बरकरार है।
प्रो. राणा कहते हैं कि यदि ताड़केश्वर खान में और जीवाश्म मिलते हैं, तो यह पता चल सकेगा कि यह अज्ञात प्राणी दिखता कैसा था और किसी प्राणी का आदिम रिश्तेदार था। इससे क्रमानुगत विकास को भी समझने में आसानी होगी।