इससे भी आश्चर्यजनक बात यह रही कि जब चेकपोस्ट पर तैनात आरटीओ के सीनियर अधिकारी के बारे में पूछा गया तो मुख्य प्रशासनिक अधिकारी दिलावर सिंह गुसाईं पास के कमरे से आए। सीओ और एसएसपी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि वह नींद से जागकर आए थे।
जब उनसे 600 रुपये वसूली का सवाल किया गया तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए। न ही ड्यूटी पर तैनात वसूली के आरोपी कर्मचारियों को उन्होंने चेतावनी दी। एसएसपी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी साफ किया है कि वसूली करने वाले कर्मचारी पुलिस की वर्दी में थे, जिससे पुलिस-प्रशासन की छवि धूमिल हुई है।
वहीं, दोनों कर्मचारियों ने सीओ मंगलौर के सामने 600 रुपये वसूल करने की बात भी कुबूल की। लिहाजा, जिलाधिकारी सीए रविशंकर ने एआरटीओ रुड़की को आदेश दिया था कि आरोपी आरटीओ कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह आदेश 30 जनवरी को दिए थे लेकिन आदेश की कॉपी फाइलों में दफन होकर रह गई।
जिलाधिकारी हरिद्वार के स्तर से इस मामले में कार्रवाई के आदेश एआरटीओ रुड़की को दिए गए थे। हमने मामले में कार्रवाई के लिए आरटीओ प्रवर्तन संदीप सैनी को पत्र भेजा हुआ है। अभी कार्रवाई होनी बाकी है।
-दीपेंद्र कुमार चौधरी, परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड