वर्ष 2020 में प्रदेश सरकार ने माना कि एलिफेंट रिजर्व के नाम पर कागजी कार्यवाही ज्यादा हो रही है। 24 नवंबर को राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में सरकार ने एलिफेंट रिजर्व को डी-नोटिफाई का फैसला किया था। इसके बाद इस अधिसूचना को निरस्त करने का आदेश भी जारी किया गया। कहा गया कि एलिफेंट रिजर्व का पूरा क्षेत्र पहले से ही घोषित संरक्षित क्षेत्र में है।
सरकार के इस फैसले से नाराज करीब 40 अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा। इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल भी की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी।
अब सरकार ने निरस्त की अधिसूचना
शासन के मुताबिक अब सरकार ने पांच हजार वर्ग किलोमीटर में फैले शिवालिक एलिफेंट रिजर्व को डी-नोटिफाई करने वाली अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। हालांकि, इससे पहले प्रदेश सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा था कि रिजर्व की अधिसूचना का निरस्त करने का आदेश वापस ले लिया गया है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के दबाव को देखते हुए यह फैसला किया था। सरकार के इस फैसले पर पीएमओ ने भी सवाल उठाया था और पर्यावरणविदों का कहना था कि जौलीग्रांट हवाई अड्डे केे विस्तार में एलिफेंट रिजर्व के अड़ंगे को दूर करने के लिए रिजर्व की अधिसूचना निरस्त की गई।
शिवालिक एलिफेंट रिजर्व की अधिसूचना को निरस्त करने का आदेश सरकार ने वापस ले लिया है। हाईकोर्ट ने भी सरकार के आदेश पर रोक लगाई थी।
- आनंद वर्द्धन, प्रमुख सचिव वन